आप ऑनलाइन ट्रेडिंग कैसे शुरू कर सकते हैं?

लाखों शौकिया हर साल ऑनलाइन ट्रेडिंग में अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन अधिकांश अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने में विफल रहते हैं और थोड़ा गरीब और बहुत समझदार हो जाते हैं। एक बात जो सभी असफल व्यक्तियों में समान होती है, वह यह है कि उनके पास अपने पक्ष में पैमाना बनाने के लिए आवश्यक मूलभूत जानकारी का अभाव होता है। लेकिन अगर कोई बाजार के रुझानों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय व्यतीत करता है, तो वे ब्रोकर किस पर पैसा बनाते हैं? अपनी सफलता की बाधाओं को सुधारने के रास्ते पर अच्छी तरह से हो सकते हैं। अधिकांश निवेशक मूल्य परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारकों को समझे बिना संपत्ति खरीदते हैं। बाजारों को प्रभावी ढंग से व्यापार करना सीखना कार्रवाई का एक बेहतर तरीका है।

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लेकिन आप ब्रोकर के बिना डीमैट खाता कैसे खोलते हैं?

हिंदी

डीमैट अकाउंट क्या होता है

डीमैट अकाउंट या डीमटीरियलाइज़ेशन अकाउंट आपके शेयर को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में रखने के लिए एक वर्चुअल लॉकर है। सेबी (SEBI) ने अनिवार्य किया है कि शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य पूंजी बाजार के साधन डिमटेरियलाइज़्ड रूप में होने चाहिए जिसे डीमैट अकाउंट कहा जाता है। डीमैट खाता भौतिक शेयर प्रमाण पत्र रखने की आवश्यकता को समाप्त करता है। शेयरों को आपके डीमैट खाते में या कहते से ऑनलाइन स्थानांतरित किया जा सकता है। डीमैट अकाउंट डीपी या डिपॉजिटरी प्रतिभागी के माध्यम से खोला जाता है, जैसे कि बैंक, स्टॉकब्रोकर, ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म आदि। आप कहीं भी जाएं, आप अपने डीमैट खाते को ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं।

ऑनलाइन अकाउंट शुरू करने के कारण ऑनलाइन ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट करना आसान और तेज़ हो गया है जो आपको ऑर्डर देने और कुछ ही मिनटों में ट्रेड करने में मदद करता है। यह आपके लेन-देन का एक डिजिटल रिकॉर्ड भी रखता है और खाते के लाभार्थी को उनकी प्रतिभूतियों की निगरानी करने में सक्षम बनाता है, हालांकि वे जब पसंद करते हैं तब। अलग-अलग डीपी (DP) अलग-अलग खता खोलने की दर लगाते हैं। कुछ डीपी (DP) जैसे बैंक जिनके साथ आपके पास पहले से सेविंग या करंट अकाउंट है, आपको बिना किसी शुल्क के डीमैट अकाउंट खोलने की अनुमति देंगे ।

जिस संस्थान में आप अपना डीमैट खाता खोलना चाहते हैं, वह डिफ़ॉल्ट रूप से आपका ब्रोकर बन जाता है। क्या वे आपकी निवेश यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेंगे और उनका ब्रोकरेज शुल्क उस ब्रोकिंग पार्टनर के प्रकार पर निर्भर करेगा जिसके साथ आप अपना डीमैट खाता खोलना चाहते हैं। आपके डीमैट खाते की प्रतिभूतियों का लेन-देन केवल आप ही कर सकते हैं। डीपी (ब्रोकर किस पर पैसा बनाते हैं? DP) केवल NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉजिटरी लिमिटेड) या CDSL (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज़ लिमिटेड) और अकाउंट होल्डर के बीच मध्यस्थ है। आपके होल्डिंग को ट्रैक करने के लिए दो सरकारी नियमित केंद्रीय डिपॉजिटरी जिम्मेदार हैं।

विभिन्न प्रकार के ब्रोकर

अपना डीमैट खाता कहां खोलना है, यह तय करना इस बात पर निर्भर करेगा कि आपको अपने ब्रोकर से किस प्रकार की सेवाओं की आवश्यकता है। व्यापक रूप से, दो प्रकार के ब्रोकर हैं। एक डिस्काउंट ब्रोकर और एक सर्विस ब्रोकर। डिस्काउंट ब्रोकर केवल उन निर्देशों का पालन करता है जो आप उन्हें देते हैं। वे आपके इनपुट के आधार पर सिक्योरिटीज़ या बिक्री में इन्वेस्ट करते हैं। दूसरी ओर सर्विस ब्रोकर आपको विकल्प प्रदान करता है और स्टॉक, आईपीओ (IPO), इंश्योरेंस और फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट जैसे विभिन्न ट्रेड करने में आपकी सहायता करता है। अगर आप सर्विस ब्रोकर के माध्यम से इन्वेस्ट करते हैं, तो ब्रोकरेज शुल्क पर ध्यान दें। वे एक फ्लैट मूल्य निर्धारण योजना या वॉल्यूम-लिंक्ड योजना की पेशकश कर सकते हैं। एक फ्लैट मूल्य निर्धारण योजना एक फ्लैट दर है जो आकार या मूल्य की परवाह किए बिना सभी लेनदेन ब्रोकर किस पर पैसा बनाते हैं? पर लगाया जाता है। वॉल्यूम-लिंक्ड प्लान एक गतिशील प्लान है जहां कमीशन शुल्क व्यापार की मात्रा के अनुपात में विपरीत रूप से आनुपातिक होते हैं। ट्रेड की वैल्यू जितनी अधिक होगी, ब्रोकरेज शुल्क कम होगा। आप कितनी बार ट्रेड करने की योजना बना रहे हैं और आपकी समग्र निवेश रणनीति के आधार पर, ब्रोकर की पसंद एक निवेशक से दूसरे में भिन्न होगी।

स्टॉक मार्केट में नए रिटेल इन्वेस्टर के लिए, सर्विस ब्रोकर का विकल्प चुनने की सलाह दी जाती है। हालांकि, फाइनेंस, ट्रेडिंग और डिस्काउंट ब्रोकर में बैकग्राउंड वाले अनुभवी इन्वेस्टर के लिए या मोबाइल या डेस्कटॉप ट्रेडिंग एप्लीकेशन के माध्यम से इन्वेस्ट करना एक उपयोगी चैनल है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस प्लेटफॉर्म के साथ निवेश करना चाहते हैं, डीपी ब्रोकरेज शुल्क मांगेगा। ब्रोकरेज शुल्क के बिना कोई डीमैट अकाउंट नहीं है।

ंड का प्रवाह

स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने के लिए आपको तीन प्रकार के अकाउंट को ऐक्टिवेट करना होगा। बैंक अकाउंट, ट्रेडिंग अकाउंट और डीमैट अकाउंट। ये तीन अकाउंट लिंक होने चाहिए। ट्रेडिंग अकाउंट का उपयोग ट्रेड चलाने या अपने स्टॉक, शेयर, कमोडिटी आदि को खरीदने और बेचने के लिए किया जाता है। खरीदारी और इन्वेस्टमेंट करने के लिए पैसे आपके बैंक अकाउंट या सेविंग अकाउंट से आते हैं। शेयर, बॉन्ड, इंस्ट्रूमेंट आदि खरीदे जाने के बाद, उन्हें आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है। अगर आप म्यूचुअल फंड के शेयर या यूनिट बेचना या रिडीम करना चाहते हैं, तो आप अपने ट्रेडिंग अकाउंट के माध्यम से बेचने के लिए ऑर्डर दे सकते हैं। यूनिट या शेयरों को डीमैट खाते से डेबिट कर दिया जाएगा और बिक्री से प्राप्त आय आपके बैंक खाते में डेबिट कर दी जाएगी।

जिस संस्थान में आपका बैंक खाता है, उसके साथ डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलना या उसी यूनिट के साथ डीमैट, ट्रेडिंग और बैंक खाता खोलना निवेश की प्रक्रिया को परेशानी मुक्त बनाता है।

आवश्यक दस्तावेज

डीमैट खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा सकती है। ब्रोकरेज फर्म आपको एप्लीकेशन फॉर्म और केवाईसी (KYC) फॉर्म प्रदान करेगी और आपकी ओर से ट्रेड और फंड के सेटलमेंट के लिए एप्लीकेंट द्वारा हस्ताक्षरित फर्म के नाम पर किए गए पावर ऑफ अटॉर्नी का अनुरोध करेगा।

डीमैट अकाउंट खोलना कुछ आसान चरणों में किया जा सकता है। निवेशक के लिए और बिज़नेस करने में आसानी के लिए इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और सरल बनाया गया है। कुछ आसान चरणों में, आप अपनी पसंद के डीपी (DP) के साथ डीमैट अकाउंट खोल सकते हैं और आज ही इन्वेस्ट करना शुरू कर सकते हैं।

Loan Tips: अगर ब्रोकर के जरिए ले रहे हैं लोन, तो भूलकर भी न करें ये पांच गलतियां, लग सकती है चपत

ब्रोकर से लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखें

लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए नौकरी, दुकान या फिर अन्य तरह का बिजनेस करते हैं। रोजाना की मेहनत के बाद जाकर आपको आपकी कमाई मिल पाती है। वहीं, इस महंगाई भरी दुनिया में लोगों की कमाई के अलावा लगभग सभी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। इसके अलावा कई बार लोगों को किन्हीं कारणों की वजह से पैसों की जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें बैंक से लोन तक लेना पड़ता है। लोन कई तरह के होते हैं, जैसे- पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन आदि। लेकिन कई बार लोगों को सीधे बैंक से लोन लेने में दिक्कतें पैदा होती है या उनकी जरूरतों के हिसाब से बैंक उन्हें उतना पैसा नहीं दे पाता है। इसकी वजह से लोगों को ब्रोकर की मदद लेनी पड़ती है, जो आपसे कुछ कमीशन लेकर आपको लोन दिलाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप किसी ब्रोकर के जरिए लोन ले रहे हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होता है ताकि आपको भविष्य में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो? शायद नहीं, तो चलिए हम आपको इस बारे में बताते हैं। आप अगली स्लाइड्स में इस बारे में जान सकते हैं.

क्या है Reinsurance प्रोसेस, कंपनियां कब ब्रोकर किस पर पैसा बनाते हैं? हायर करती हैं रीइंश्योरेंस ब्रोकर- जानें फायदे

एक रीइंश्योरेंस कॅान्ट्रेक्ट एक बीमा कंपनी और एक रीइंश्योरेंस कंपनी के बीच होता है. रिस्क को कम करने के लिए रीइंश्योरेंस ब्रोकर को सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है.

कई मामलों में, बीमा कंपनियां रीइंश्योरेंस ब्रोकर की सेवाओं का यूज करके इन कंपनियों के साथ डील करती हैं. साधारण शब्दों में समझें तो रीइंश्योरेंस एक ऐसा इंश्योरेंस है जो एक इंश्योरेंस कंपनी खुद को रिस्क से बचाने के लिए खरीदती है. रीइंश्योरेंस की प्रोसेस मुश्किल हो सकती है. ये इंडिविजुअल पॉलिसी खरीदने जैसा नहीं है. जहां बहुत कम संख्या में ऑप्शन मिल जाते हैं. बीमा कंपनियों की बैलेंस शीट पर बड़े रिस्क होते हैं. इन रिस्क को कम करने के लिए रीइंश्योरेंस ब्रोकर को सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है. ये ब्रोकर बीमा करने का सबसे अच्छा और सस्ता तरीका खोजने में माहिर होते हैं. इसलिए कई बीमा कंपनियां अपनी सर्विस को ज्यादा अच्छा बनाने के लिए रीइंश्योरेंस ब्रोकरों को हायर करती हैं. इन ब्रोकरों का एक्सपीरियंस बीमा कंपनियों के बहुत काम आता है. ये ब्रोकर कमीशन के रूप में या फिक्स प्राइस के रूप में कमाई करते है. कभी-कभी रीइंश्योरेंस बिजनेस के लिए एक फिक्स राशि पर मिनिमम फिक्स प्राइस का भुगतान किया जाता है. और फिर रीइंश्योरेंस ब्रोकरों को उसी कंपनी के साथ अपना बिजनेस करने के लिए अच्छे-खासे कमीशन की पेशकश की जाती है.

रीइंश्योरेंस ब्रोकर कौन-कौन सी सुविधाएं देते हैं


पॅालिसी का सिलेक्शन

ऐसे कई तरीके हैं जिनमें अलग-अलग तरह की रीइंश्योरेंस पॅालिसी का इस्तेमाल करके एक ही रिस्क को कवर किया जा सकता है. रीइंश्योरेंस ब्रोकर को रीइंश्योरेंस पॅालिसी लेने का काफी एक्सपीरियंस होता है. अपने डेटा के आधार पर, वे बेहतर तरीके से जानते हैं कि किस तरह के रिस्क को कवर के लिए कौनसी पॅालिसी बढ़िया कवरेज देगी.

नेगोशिएटिंग रेट

रीइंश्योरेंस ब्रोकर बड़ी संख्या में फर्मों के लिए रीइंश्योरेंस पॅालिसी खरीदते हैं. इसलिए रीइंश्योरेंस ब्रोकर बहुत सारे बिजनेस को कंट्रोल करते हैं. रीइंश्योरेंस कंपनियाँ इन ब्रोकर को स्पेशल रेट देती हैं. जो बीमा कंपनी के डायरेक्ट अपनी पॉलिसी को लाने पर उपलब्ध नहीं होती हैं.

प्रशासनिक कार्यों में सहायता

रीइंश्योरेंस पॉलिसी जारी करना एक पेंचीदा काम है. इसके लिए कागजी कार्रवाई के रूप में बहुत अधिक प्रशासनिक कामों की जरुरत होती है. इसलिए ब्रोकर का काम ये होता है कि वो रीइंश्योरेंस कॅान्ट्रेक्ट के पॅालिसी नियमों का ध्यान से इवेल्यूएशन करे. इन प्रशासनिक कामों के लिए बाजार से संबंधित बहुत ज्यादा स्किल्ड और एक्सपीरियंस वाले इंसान की जरुरत होती है.

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क्लेम करने के लिए असिस्टेंस मिलता है

रीइंश्योरेंस ब्रोकर बाजार को इतनी अच्छी तरह से जानते हैं, कि वे हर तरह के क्लेम के भुगतान रेशो को समझते हैं. इसलिए ब्रोकर अपने ग्राहकों को जितना हो सके उतनी जल्दी डेडलाइन के भीतर क्लेम दिलवाने में मदद करते हैं. ये जरुरी दस्तावेजों के बारे में भी जानते हैं जिनकी क्लेम करने की प्रोसेस में जरुरत होती है. हालांकि ये तय करना बीमा कंपनी का काम है कि प्रीमियम का भुगतान समय पर किया जाए. लेकिन बीमा कंपनियों के पास कई पॅालिसी होती हैं. इस कारण वे भुगतान करने से चूक सकती हैं. इसलिए ज्यादातर ब्रोकर कस्टमर के बिहाफ पर प्रीमियम को पे कर देते हैं. जिसका चार्ज वे बाद में ग्राहक से वसूल लेते हैं.

शेयर मार्केट में ब्रोकर क्या है? ब्रोकरेज चार्जेस की गणना किस प्रकार की जाती है?

शेयर मार्केट में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयर की खरीद बेच होती है जिसके लिए हमारे पास डीमैट अकाउंट तथा ट्रेडिंग अकाउंट का होना आवश्यक है परंतु हमें पता होना चाहिए कि हम सीधे तौर पर शेयर मार्केट (Share Market) में शेयर की खरीद बेच नहीं कर सकते हैं इसके लिए हमें एक माध्यम की आवश्यकता होती है जिसे ब्रोकर (Broker) कहा जाता है। ब्रोकर द्वारा हमें इंटरनेट पर एक ब्रोकिंग प्लेटफार्म प्रदान किया जाता है जिसकी मदद से हम शेयर संबंधित लेन देन कर पाते हैं।

ब्रोकर क्या है? | Broker in Hindi

ब्रोकर(Broker) एक वित्तीय माध्यम बिचौलिया अथवा एजेंट होता है जिसके माध्यम से हम शेयर मार्केट में शेयर को खरीद बेच कर पाते हैं। ब्रोकर हमें विभिन्न वित्तीय साधनों जैसे Stocks Futures तथा derivative की खरीद बेच में मदद करता है।

शेयर ब्रोकर क्या है?

शेयर मार्केट में मुख्यतः दो प्रकार के ब्रोकर होते हैं

  • Full Time ब्रोकर – वे ब्रोकर जो शेयर की खरीद बेच के माध्यम के साथ-साथ अन्य सुविधाओं जैसे मार्केट रिपोर्ट्स शेयर के संबंध में सलाह, शेयर के बारे में रिसर्च आदि उपलब्ध कराते हैं वह Full Time ब्रोकर कहलाते हैं
  • Discount ब्रोकर – वे ब्रोकर जो कम ब्रोकिंग चार्जेस के साथ शेयरों की खरीद बेच में मदद करते हैं वे डिस्काउंट ब्रोकर कहलाते हैं ये अन्य कोई सुविधा नहीं प्रदान करते हैं

ब्रोकिंग चार्जेस क्या होते हैं?

वे शुल्क जो ब्रोकर द्वारा अपनी सुविधाओं के एवज में लिया जाता है उसे ब्रोकिंग चार्जेस कहते हैं सभी ब्रोकरो के चार्ज एक से नहीं होते हैं यह इस पर भी निर्भर करते हैं कि किस प्रकार के ट्रांजैक्शन हमारे द्वारा किए जाते हैं यह शुल्क ब्रोकर द्वारा समय समय पर घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है।

भारत में किस प्रकार के ब्रोकर प्लान उपलब्ध हैं?

भारत में ब्रोकर द्वारा बता दो प्रकार के प्लान प्रदान किए जाते हैं

  1. Monthly Unlimited trading plan इसके अंतर्गत निवेशकों अथवा शेयरधारकों को एक निश्चित मासिक राशि शुल्क के रूप में ब्रोकर(Broker) को प्रदान की जाती है इसके तहत वे एक माह में असीमित stocks तथा securities की खरीद बेच कर सकते हैं।
  2. Flat per trade brokerage इसके अंतर्गत निवेशकों अथवा शेयरधारकों को प्रति सौदा के हिसाब से ब्रोकर को शुल्क चुकाना पड़ता है।

ट्रेडिंग हेतु ब्रोकरेज चार्ज की गणना किस प्रकार की जाती है?

ब्रोकर(Broker) शुल्क या ब्रोकरेज की गणना शेयर की खरीद बेच पर कुल कीमत के आधार पर एक निश्चित प्रतिशत के रूप में तय की जाती है यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है

  • Intraday Trading जब किसी व्यक्ति द्वारा शेयर की खरीद तथा बेच एक ही दिन में की जाती है उस स्थिति में व्यक्ति द्वारा किए गए सौदे पर Intraday Trading शुल्क चुकाया जाता है।

जैसे किसी व्यक्ति द्वारा शेयर को खरीद कर उसी दिन ट्रेडिंग सेशन की समाप्ति के पूर्व शेयर को बेच दिया जाता है एसएसबी में ब्रोकर(Broker) शुल्क की गणना इंट्राडे ट्रेडिंग के अंतर्गत की जाती है इस स्थिति के लिए बेचे गाए और खरीदे गाए शेयर की संख्या समान होना आवश्यक है। इस प्रकार के सौदे पर ब्रोकर द्वारा लगाया गया intraday Trading शुल्क 0.01% से 0.05% के मध्य खरीद बेच किए गए शेयर की संख्या पर आधारित होता है। Intraday ब्रोकिंग शुल्क की गणना के लिए शेयर की बाजार कीमत को शेयर की संख्या तथा इंट्राडे शुल्क प्रतिशत के साथ गुणा कर की जाती है

  • Delivery Charges जब किसी व्यक्ति द्वारा शेयर मार्केट (Share Market) में शेयर की खरीद बेच 1 दिन में नहीं की जाती है तब उस स्थिति में ब्रोकिंग चार्जेस की गणना डिलीवरी शुल्क के अंतर्गत की जाती है।

इस स्थिति में डिलीवरी चार्ज 0.2% तथा 0.75 % के मध्य होता है जो कि सौदे में किए गए शेयर की संख्या पर निर्भर करता है।

इस प्रकार से डिलीवरी चार्ज की गणना के लिए डिलीवरी चार्ज प्रतिशत को खरीद बेच में प्रयुक्त शेयर की संख्या से गुणा किया जाता है।

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग शुल्क के अलावा अन्य कौन-कौन से शुल्क होते हैं?

ब्रोकर के सभी चार्ज

  • Transaction Charges शेयर मार्केट(Share Market) में शेयर की खरीद बेच के दौरान स्टॉक एक्सचेंज द्वारा शुल्क लिया जाता है जिसे ट्रांजैक्शन चार्जेस कहा जाता है यह ट्रांजैक्शन चार्ज मुख्य रूप से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एनएसई तथा मुंबई स्टॉक एक्सचेंज बीएसई द्वारा लिए जाते हैं।
  • Security Transaction charges यह शुल्क सौदे (trade) में उपयुक्त securities की कीमत के आधार पर लगाया जाता है।
  • Commodity transaction charges यह शुल्क स्टॉक एक्सचेंज में commodity derivative के सौदे (trade) पर लगाया जाता है।
  • Stamp duty (स्टांप शुल्क) यह शुल्क राज्य सरकार द्वारा securities इसकी trading पर लगाया जाता है।
  • GST (goods and service tax)वस्तु एवम सेवा कर यह शुल्क केंद्र सरकार द्वारा ट्रांजैक्शन चार्जेस तथा ब्रोकिंग शुल्क पर लगाया जाता है। वर्तमान में यह 18% है।
  • SEBI turnover charges यह शुल्क बाजार नियामक संस्था सेबी द्वारा सभी प्रकार के वित्तीय लेन देन जैसे stocks तथा सभी securities (debt को छोड़कर आदि पर लगाया जाता है।
  • DP( Depository Participants)

जब हम किसी शेयर की खरीद बेच एक ही trading session के दौरान नहीं करते हैं। उस स्थिति में यह शुल्क depository participants द्वारा लिया जाता है। Intraday Trading के दौरान यह शुल्क देय नहीं होता है। यह शुल्क शेयर की संख्या पर निर्भर ना होकर एक निश्चित राशि के रूप में लिया जाता है।

शेयर मार्केट में ब्रोकर से जुड़े कुछ सवाल जवाब

शेयर मार्केट(Share Market) में कितने प्रकार के ब्रोकर होते हैं?

शेयर मार्केट में कितने दो प्रकार के ब्रोकर होते हैं-
Full Time ब्रोकर तथा Discount ब्रोकर

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