Human Development Index- ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स

क्या होता है ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स?
Human Development Index: ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स यानी मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) विभिन्न देशों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के स्तर को मापने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) द्वारा विकसित और संकलित आंकड़ा है। इसमें चार प्रमुख क्षेत्र शामिल होते हैं: स्कूलिंग का औसत वर्ष, स्कूलिंग के अपेक्षित वर्ष, जन्म के समय उम्र प्रत्याशा और सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति। यह इंडेक्स एक ऐसा टूल है जिसका उपयोग समय के साथ होने वाले विकास स्तरों में बदलाव का अनुसरण करने और विभिन्न देशों के विकास स्तरों की तुलना करने के लिए किया जाता है।

मुख्य बातें
- एचडीआई प्रत्येक देश में इंडीविजुअल मानव विकास के स्तर का मूल्यांकन करने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा प्रयुक्त एक माप प्रणाली है।
-एचडीआई रैंकिंग करने और देशों की तुलना करने के लिए औसत वार्षिक आय व शैक्षणिक अपेक्षाओं जैसे कंपोनेंट का उपयोग करता है।
-सामाजिक पक्षकारों द्वारा एचडीआई की आलोचना की गई है कि यह जीवन की गुणवत्ता की समुचित और व्यापक माप का प्रतिनिधित्व नहीं करता और अर्थशास्त्रियों द्वारा आलोचना की गई है कि यह आर्थिक जीवन स्तर के सरल मापों से परे बहुत कम उपयोगी सूचना उपलब्ध कराता है।

एचडीआई को समझना
एचडीआई की स्थापना व्यक्ति विशेषों पर, मुख्य रूप से संतोषजनक कार्य और जीवन अर्जित करने के उनके अवसरों पर जोर डालने के लिए की गई थी। इंडीविजुअल मानव विकास के लिए किसी देश की संभावना का मूल्यांकन करना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) जैसे मानक आर्थिक विकास आंकड़ों पर विचार करने के अतिरिक्त किसी देश के विकास के स्तर कि मूल्यांकन के लिए एक पूरक मेट्रिक उपलब्ध कराता है। इस इंडेक्स का उपयोग देशों के विभिन्न नीति विकल्पों की जांच के लिए भी किया जा सकता है।

एचडीआई की सीमाएं
एचडीआई मानव विकास का सरलीकरण और स्पष्ट रूप से सीमित मूल्यांकन है। एचडीआई विशिष्ट रूप से जीवन की गुणवत्ता, जैसेकि सशक्तिकरण मूवमेंट या सिक्योरिटी की समग्र भावना जैसे कारकों को भी प्रदर्शित नहीं करता। मानव विकास रिपोर्ट आफिस (एचडीआरओ) इन तथ्यों के स्वीकरण में, जेंडर असमानता या प्रजातिगत भेदभाव जैसे विषमता मुद्दों सहित जीवन के अन्य पहलुओं के मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त कंपोजिट सूचकांक उपलब्ध कराता है।

सूचकांकों के प्रकार

पूरी दुनिया के लोगों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास को मापने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा विभिन्न प्रकार के सूचकांकों का निर्माण किया गया है। इन सूचकांकों में लैंगिक असमानता सूचकांक, मानव विकास सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक और प्रौद्योगिकी उपलब्धि सूचकांक शामिल हैं।

पूरी दुनिया के लोगों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास को मापने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा विभिन्न प्रकार के सूचकांकों का निर्माण किया गया है। इन सूचकांकों में लैंगिक असमानता सूचकांक, मानव विकास सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक और प्रौद्योगिकी उपलब्धि सूचकांक शामिल हैं।

लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) एक नया सूचकांक है जिसकी शुरूआत लिंग असमानता की माप के लिए 2010 में मानव विकास रिपोर्ट की 20वीं वर्षगांठ संस्करण के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा की गयी थी। UNDP के अनुसार, यह सूचकांक उन सभी की तत्वों की गणना करता प्रमुख संकेतक और सूचकांक है जिनकी वजह से देश की छवि को नुकसान पहुंचता हैंI इसकी गणना करने के लिए तीन आयामों का उपयोग किया जाता है: (I) प्रजनन स्वास्थ्य, (ii) अधिकारिता, और (iii) श्रम बाजार भागीदारी। पिछली कमियों को दूर करने के लिए नए सूचकांक को एक प्रयोगात्मक रूप में पेश किया गया हैI ये सूचकांक हैं,लिंग विकास सूचकांक (प्रमुख संकेतक और सूचकांक जीडीआई) और लिंग सशक्तिकरण उपाय (जीईएम), दोनों की शुरूआत 1995 की मानव विकास रिपोर्ट में की गई।

  • प्रजनन स्वास्थ्य के जीआईआई के दो संकेतक हैं (i) मातृत्व मृत्यु दर (MMR) और (ii) किशोर प्रजनन दर (AFR)
  • सशक्तिकरण आयाम को दो संकेतकों द्वारा मापा जाता है: (I) प्रत्येक लिंग (सेक्स) के लिए आरक्षित की गई संसदीय सीटों का हिस्सा और (ii) उच्च शिक्षा प्राप्ति का स्तर।
  • श्रम बाजार आयाम की गणना कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी से की जाती है। इस आयाम में कार्य भुगतान, अवैतनिक काम और सक्रिय रूप से कार्य की तलाश शामिल है। मानव विकास रिपोर्ट 2011 के अनुसार लैंगिक असमानता सूचकांक में भारत बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी नीचे है, 146 देशों की सूची में भारत का रैंक 129 th है, जबकि बांग्लादेश का 112 nd और पाकिस्तान का 115 th स्थान हैं।
  • ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों में स्थिति देखी जाए तो भारत में मानव विकास में सर्वाधिक असमानताएं हैं I

बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index)

बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) को 2010 में ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा विकसित किया गया था। यह आय-आधारित सूचियों से परे गरीबी का निर्धारण करने के लिए विभिन्न कारकों का उपयोग करता था। इसने पुराने मानव गरीबी सूचकांक का स्थान लिया है।

एमपीआई एक तीव्र बहुआयामी गरीबी की सूची है। यह प्रर्दर्शित करती है कि लोग कई मुद्दों पर गरीब हैंI यह लोगों के लिए बहुत ही मामूली सेवाओं और महत्वपूर्ण मानव कामकाज के अभाव को दर्शाता है।

मानव विकास सूचकांक की गणना करने के लिए इस तीन मापदंडों का प्रयोग किया जाता है: (I) जीवन प्रत्याशा (ii) शिक्षा, और (iii) रहने का जीवन स्तर (Standard of Living)। इस सूचकांक की गणना 10 संकेतकों द्वारा की जाती है।

आयाम( Dimensions )

संकेतक (indicator)

तकनीकी उपलब्धि सूचकांक (Technological Achievement Index (TAI)

प्रौद्योगिकी उपलब्धि सूचकांक (टीएआई) का प्रयोग यूएनडीपी (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) द्वारा देश के तकनीकी उन्नति और प्रसार को मापने तथा एक मानव कौशल के आधार का निर्माण, नेटवर्क युग की प्रौद्योगिकीय नवाचारों में भाग लेने की क्षमता को दर्शाता है। टीएआई तकनीकी क्षमता के चार आयामों पर केंद्रित है: (I) प्रौद्योगिकी का निर्माण, (ii) हाल ही में नवाचारों के प्रसार, (iii) पुराने नवाचारों का प्रसार, और (iv) मानव कौशल।

प्रौद्योगिकी सृजन: प्रति व्यक्ति निवासियों के लिए दिए गए पेटेंट की संख्या और विदेशों से प्रति व्यक्ति रॉयल्टी तथा लाइसेंस फीस की प्राप्तियों द्वारा मापा जाता है।

नये नवाचारों का प्रसार: प्रति व्यक्ति इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या और निर्यात के कुल माल में उच्च प्रौद्योगिकी और मध्यम प्रौद्योगिकी निर्यात की हिस्सेदारी से मापा जाता है।

पुराने नवाचारों का प्रसार: प्रति व्यक्ति टेलीफोन (मुख्य लाइन और सेलुलर) और प्रति व्यक्ति बिजली की खपत द्वारा मापा जाता है।

मानव कौशल: 15 वर्ष तक की आयु वर्ग कितनी आवादी स्कूल जाने वालों की है

की स्कूली आबादी और पुराने तथा सकल तृतीयक विज्ञान नामांकन अनुपात द्वारा मापा जाता है।

मानव विकास सूचकांक (HDI):-

मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और जीवन स्तर का समग्र आंकड़ा है जो मानव विकास के चार स्तरों में देशों के रैंक का सूचकांक प्रदर्शित करता है। इसकी स्थापना सबसे पहले पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक और इसके बाद अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा (1995) में की गई थी जिसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रकाशित किया गया था।

2010 की मानव विकास रिपोर्ट में यूएनडीपी ने मानव विकास सूचकांक की गणना करने के लिए एक नई विधि का उपयोग शुरू किया। इसमें निम्नलिखित तीन सूचकांकों का प्रयोग किया जा रहा है:

मानव विकास सूचकांक (HDI – Human Development Index) क्या है

मानव विकास सूचकांक (HDI – Human Development Index) क्या है :- मानव विकास सूचकांक (HDI) संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रतिवर्ष जारी होने वाली एक वार्षिक रिपोर्ट है जो कि विभिन्न देशों कि जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और आय के मानकों के आधार पर प्रकाशित की जाती है। सर्वप्रथम वर्ष 1990 में मानव विकास सूचकांक (HDI – एचडीआई) रिपोर्ट जारी की गई थी।

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को देशों की प्रगति प्रमुख संकेतक और सूचकांक को मापने के लिए एक पैमाने की आवश्यकता शुरू से ही थी। मानव विकास सूचकांक (HDI- Human Development Index) का विकास इसी क्रम में किया गया है। किसी भी देश की प्रगति को दो भागों में बांटकर समझा जा सकता संवृद्धि और विकास।

संवृद्धि (Growth)- संवृद्धि का आशय मुख्यतः आर्थिक मात्रात्मक परिवर्तन से है। अर्थात एक निश्चित समयावधि में किसी अर्थव्यवस्था में होने वाली वास्तविक आय वृद्धि को संवृद्धि कहते हैं।

विकास (Development)- विकास का अभिप्राय अर्थव्यवस्था में मात्रात्मक बढ़ोतरी के साथ-साथ गुणात्मक परिवर्तन से भी है। अर्थात राष्ट्रीय आय में वृद्धि के साथ-साथ गरीबी, असमानता, बेरोजगारी को भी कम करना एवं जीवन स्तर का ऊंचा होना विकास कहलाता है।

आर्थिक विकास मापक – आर्थिक विकास को मापने की शुरुआत 1990 में UNDP (United Nation Development Program) के द्वारा की गयी। UNDP ने समय-समय पर निम्नलिखित रिपोर्ट एवं सूचकांक के माध्यम से आर्थिक विकास को मापने का प्रयास किया। इन सभी सूचकांकों का परिचय कालक्रमानुसार नीचे बताया गया है –

1990- Human Development Report/ Human Development Index
मानव विकास रिपोर्ट/मानव विकास सूचकांक

इस सूचकांक के तीन आधार थे –

  1. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income)
  2. साक्षरता (Education)
  3. जीवत प्रत्याशा (Life Expediency)

1995- Gender Development Report/ Gender Development Index
लैंगिक विकास रिपोर्ट/ लैंगिक विकास सूचकांक

ये सूचकांक केवल महिलाओं के लिए था। इस सूचकांक में HDR के तीनों आधारों को केवल महिलाओं के संदर्भ में देखा जाता है।

1995- Gender Empowerment Report/ Gender Empowerment Index
लैंगिक सशक्तिकरण रिपोर्ट/ लैंगिक सशक्तिकरण सूचकांक

केवल महिलाओं के लिए लागू किया गया था। इस रिपोर्ट के द्वारा ये पता लगाया जाता था कि एक समय अवधि के दौरान में महिलाएं राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से कितना सशक्त हुयीं हैं।
इस सूचकांक के प्रमुख दो आधार थे –

1. अर्थव्यवस्था में महिलाओं का नियंत्रण।
2. राजनीति में महिलाओं की स्थिति एवं भागीदारी।

1997- Human Poverty Report/ Human Poverty Index
मानव गरीबी रिपोर्ट/ मानव गरीबी सूचकांक

इस सूचकांक का मुख्य उद्देश्य देश में गरीबी की स्थिति के सटीक आंकड़े जुटाना था। इसे तीन आधार पर निर्धारित किया जाता था –

1. कुपोषण
2. वयस्क शिक्षा
3. जीवन प्रत्याशा 40 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

उपरोक्त आंकड़ो के आधार पर इस सूचकांक को विकासशील देशों के आर्थिक विकास को मापने के लिए अधिक उपयोगी माना गया।

1998- Human Poverty Report II/ Human Poverty Index II
मानव गरीबी रिपोर्ट II/ मानव गरीबी सूचकांक-II

इस सूचकांक को पिछले सूचकांक के ही तीनों आधारों में सुधार करके बनाया गया था, जिससे इसे विकसित देशों के विकास को मापने के काम में लाया जा सके –

1. बेरोजगारी एवं अकुशल व्यक्तियों की संख्या।
2. गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या।
3. 60 वर्ष से ज्यादा जीवन प्रत्याशा होनी अनिवार्य।

जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है UNDP द्वारा अलग-अलग प्रकार के सूचकांक निकाले गये जिनके माध्यम से पता लगाया जा सके कि देश में विकास हो रहा है या नहीं। इन सभी सूचकांकों में से सबसे प्रचलित सूचकांक है मानव विकास सूचकांक (HDI-Human Development Index)। भारत सहित दुनिया के सभी देशों में HDI (मानव विकास सूचकांक) से आर्थिक विकास को मापा जाता है।

मानव विकास सूचकांक (HDI)

आर्थिक विकास को मापने के उद्देश्य से इस सूचकांक का प्रतिपादन 1990 में UNDP (United Nation Development Program) से जुड़े पाकिस्तानी मूल के अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक व उनके सहयोगी नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने किया था। जिनके 3 आधारभूत आयाम शिक्षा, स्वास्थ्य व जीवन स्तर हैं।

मानव विकास सूचकांक HDI - Human Development Index formula

इस सूत्र से मानव विकास सूचकांक (HDI) हमेशा 0 से 1 के बीच आती है।

HDI के आंकड़ों के आधार पर देश को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है, जिसका विवरण निम्नवत है –

1. अल्पविकसित देश- (0 से 0.499)
2. विकासशील देश- (0.499 से 0.799)
3. विकसित देश- (0.799 से 1)

विश्व में कुछ ऐसे देश भी हैं जिन्होंने HDI को देश के विकास के सूचक के रूप में स्वीकार नहीं किया जैसे – भूटान। भूटान वर्ष 1970 से एक रिपोर्ट जारी करता है जिसे खुशहाली रिपोर्ट (Happiness Index) कहते हैं। वर्ष 2011-2012 में UNDP ने भी भूटान के मानदंडों को स्वीकारा Gross Happiness Report/ Index को अपनाया। ये भी 0 से 1 के बीच होता है।

मानव विकास सूचकांक के प्रमुख संकेतक कौन कौन से हैं?

मानव विकास सूचकांक के प्रमुख संकेतक कौन कौन से हैं?

इसे सुनेंरोकेंमानव विकास सूचकांक (एचडीआई) [जीवन प्रत्याशा], [शिक्षा], और [प्रति व्यक्ति आय] संकेतकों का एक समग्र आंकड़ा है, जो मानव विकास के चार स्तरों पर देशों को श्रेणीगत करने में उपयोग किया जाता है। जिस देश की जीवन प्रत्याशा, शिक्षा स्तर एवं जीडीपी प्रति व्यक्ति अधिक होती है, उसे उच्च श्रेणी प्राप्त होती हैं।

मानव विकास सूचकांक का मूल्य क्या है?

इसे सुनेंरोकेंसंपूर्ण प्रदर्शन: वर्ष 2019 के लिये HDI 0.645 है, जो देश को ‘मध्यम मानव विकास’ श्रेणी में तथा 189 देशों में 131वें स्थान पर रखता है। वर्ष 1990 और 2019 के मध्य भारत का HDI मान 0.429 से बढ़कर 0.645 हो गया है, यानी इसमें 50.3% की वृद्धि हुई है।

मानव विकास हेतु कौन कौन से मापदंडों का प्रयोग किया जाता है?

निम्नलिखित तीन सूचकांक इस्तेमाल किये जा रहे हैं:

  • जीवन प्रत्याशा सूचकांक (लम्बा व स्वस्थ जीवन)
  • शिक्षा सूचकांक (शिक्षा का स्तर)
  • आय सूचकांक (जीवन स्तर)

मानव विकास सूचकांक में क्या शामिल है?

इसे सुनेंरोकेंइसमें चार प्रमुख क्षेत्र शामिल होते हैं: स्कूलिंग का औसत वर्ष, स्कूलिंग के अपेक्षित वर्ष, जन्म के समय उम्र प्रत्याशा और सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति। यह इंडेक्स एक ऐसा टूल है जिसका उपयोग समय के साथ होने वाले विकास स्तरों में बदलाव का अनुसरण करने और विभिन्न देशों के विकास स्तरों की तुलना करने के लिए किया जाता है।

उच्च मानव विकास समूह में कितने देश सम्मिलित है?

इसे सुनेंरोकेंपहली श्रेणी “बेहद उच्च मानव विकास” है जिसमें कुल 62 देश शामिल हैं। इस श्रेणी में नॉर्वे पहले, स्विट्जरलैंड दूसरे, आयरलैंड तीसरे, जर्मनी चौथे और हांगकांग चोटी के पांच देशों में शामिल हैं। दूसरी श्रेणी “उच्च मानव विकास” है जिसमें 63 से 116 पायदान पर रहे देश शामिल हैं। तीसरी श्रेणी “मध्यम मानव विकास” से संबंधित है।

मानव विकास प्रतिवेदन से क्या आशय है अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए?

इसे सुनेंरोकेंयह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP )के कार्यालय के द्वारा विभिन्न प्रकार के विकास के आयामों से संबंधित आंकड़े जैसे:-शिक्षा, स्वास्थ्य, आय, गरीबी, लैंगिक इत्यादि का संकलन, विश्लेषण और प्रकाशन मानव विकास प्रतिवेदन (रिपोर्ट ) कहा जाता है। इसे प्रथम बार वर्ष 1990 में UNDP द्वारा प्रकाशित किया गया था।

मानव विकास का क्या अभिप्राय है उत्तर?

इसे सुनेंरोकेंमानव विकास, स्वास्थ्य भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतंत्रता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों प्रमुख संकेतक और सूचकांक में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।

मानव विकास से आप क्या समझते हैं?

इसे सुनेंरोकेंअतः लोगों के विकल्पों में वृद्धि करना, उनके जीवन में सुधार एवं सार्थकता को विकसित करना और लोगों में क्षमताओं का निर्माण करने की प्रक्रिया को मानव विकास के रूप में परिभाषित किया जाता है।

इसे सुनेंरोकेंमानव विकास रिपोर्ट तीन संकेतकों-स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर-को मिलाकर विकास को मापती है। इन तीनों संकेतकों को समग्र रूप से मानव विकास सूचकांक यानी एच.डी. आई. में बदल दिया जाता है।

भारत के लिए मानव विकास सूचकांक के खराब प्रदर्शन से क्या अभिप्राय है?

इसे सुनेंरोकेंआय असमानता में वृद्धि: आय के मामले में बढ़ती असमानता मानव विकास के अन्य मानकों में खराब प्रदर्शन का कारण बनती है। उच्च आय असमानता वाले देशों में पीढ़ीगत आय गतिशीलता में भी कमी देखी गई है।

मानव विकास सूचकांक का पैमाना क्या है?

इसे सुनेंरोकेंजिनके 3 आधारभूत आयाम शिक्षा, स्वास्थ्य व जीवन स्तर हैं। इस सूत्र से मानव विकास सूचकांक (HDI) हमेशा 0 से 1 के बीच आती है। विश्व में कुछ ऐसे देश भी हैं जिन्होंने HDI को देश के विकास के सूचक के रूप में स्वीकार नहीं किया जैसे – भूटान।

विकास का महत्वपूर्ण घटक क्या है?

इसे सुनेंरोकेंमानव-विकास के विकास के विभिन्न घटकों का पता करें (संकेत-मस्तिष्क साइज और कार्य, कंकाल-संचना, भोजन में पसंदगी आदि )। Video Solution: मानव-विकास के विकास के विभिन्न घटकों का पता करें (संकेत-मस्तिष्क साइज और कार्य, कंकाल-संचना, भोजन में पसंदगी आदि )।

मानव विकास रिपोर्ट कौन प्रचालित करता है?

इसे सुनेंरोकेंमानव विकास रिपोर्ट हर साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी की जाती है।

Human Development Index (HDI) क्या है?

मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है? [What is Human Development Index (HDI)?In Hindi]

एचडीआई इस बात पर जोर देने के लिए बनाया गया था कि किसी देश के विकास का आकलन करने के लिए लोगों और उनकी क्षमताओं को अंतिम मानदंड होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक विकास। एचडीआई का उपयोग राष्ट्रीय नीति विकल्पों पर सवाल उठाने के लिए भी किया जा सकता है, यह पूछते हुए कि प्रति व्यक्ति जीएनआई (GNI) के समान स्तर वाले दो देश अलग-अलग मानव विकास परिणामों के साथ कैसे समाप्त हो सकते हैं। ये विरोधाभास सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं के बारे में बहस को बढ़ावा दे सकते हैं।

Human Development Index (HDI) क्या है?

मानव विकास सूचकांक (HDI) मानव विकास के प्रमुख आयामों में औसत उपलब्धि का एक सारांश उपाय है: एक लंबा और स्वस्थ जीवन, जानकार होना और एक सभ्य जीवन स्तर होना। एचडीआई तीन आयामों में से प्रत्येक के लिए सामान्यीकृत सूचकांकों का ज्यामितीय माध्य है।

'मानव विकास सूचकांक' की परिभाषा [Definition of 'Human Development Index'] [In Hindi]

मानव विकास सूचकांक (HDI) एक सांख्यिकीय उपकरण (Statistical Tools ) है जिसका उपयोग किसी देश की सामाजिक और आर्थिक आयामों में समग्र उपलब्धि को मापने के लिए किया जाता है। किसी देश के सामाजिक और आर्थिक आयाम लोगों के स्वास्थ्य, उनकी शिक्षा प्राप्ति के स्तर और उनके जीवन स्तर पर आधारित होते हैं। Gross Domestics Savings क्या है?

पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक ने 1990 में एचडीआई बनाया था जिसका इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा देश के विकास को मापने के लिए किया गया था। सूचकांक की गणना चार प्रमुख संकेतकों को जोड़ती है: स्वास्थ्य के लिए जीवन प्रत्याशा, स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष, शिक्षा के लिए स्कूली शिक्षा के वर्ष और जीवन स्तर के लिए प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय।

यूएनडीपी हर साल अपनी वार्षिक रिपोर्ट में जारी एचडीआई रिपोर्ट के आधार पर देशों की रैंकिंग करता है। किसी देश के विकास के स्तर पर नज़र रखने के लिए एचडीआई सबसे अच्छे साधनों में से एक है, क्योंकि यह सभी प्रमुख सामाजिक और आर्थिक संकेतकों को जोड़ता है जो आर्थिक विकास के लिए जिम्मेदार हैं।

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