2015 में भारत ने 130वाँ स्थान लाया और भारत का स्कोर था – – 0.609. Norway ने 1st rank, Australia ने 2nd रैंक और Switzerland 3rd स्थान प्राप्त किया.

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2020

बहुआयामी गरीबी : बहुआयामी गरीबी दैनिक जीवन में गरीब लोगों द्वारा अनुभव किए गए विभिन्न अभावों को समाहित करती है - जैसे खराब स्वास्थ्य , शिक्षा की कमी , जीवन स्तर में अपर्याप्तता , बेरोजगारी , काम की खराब गुणवत्ता आदि।

सूचकांक आयाम तथा संकेतक : यह बताता है कि लोग 10 संकेतक सहित तीन प्रमुख आयामों ' स्वास्थ्य ', ' शिक्षा ' और ' जीवन स्तर ' में कैसे पीछे छूट जाते हैं। जो लोग इन भारित संकेतकों में से कम से कम एक तिहाई में अभाव का अनुभव करते हैं , वे बहुआयामी रूप से गरीब की श्रेणी में आते हैं।

Human Development Index (HDI) क्या है?

मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है? [What is Human Development Index (HDI)?In Hindi]

एचडीआई इस बात पर जोर देने के लिए बनाया गया था कि किसी देश के विकास का आकलन करने के लिए लोगों और उनकी क्षमताओं को अंतिम मानदंड होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक विकास। एचडीआई का उपयोग राष्ट्रीय नीति विकल्पों पर सवाल उठाने के लिए भी किया जा सकता है, यह पूछते हुए कि प्रति व्यक्ति जीएनआई (GNI) के समान स्तर वाले दो देश अलग-अलग मानव विकास परिणामों के साथ कैसे समाप्त हो सकते हैं। ये विरोधाभास सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं के बारे में बहस को बढ़ावा दे सकते हैं।

Human Development Index (HDI) क्या है?

मानव विकास सूचकांक (HDI) मानव विकास के प्रमुख आयामों में औसत उपलब्धि का एक सारांश उपाय है: एक लंबा और स्वस्थ जीवन, जानकार होना और एक सभ्य जीवन स्तर होना। एचडीआई तीन आयामों में से प्रत्येक के लिए सामान्यीकृत सूचकांकों का ज्यामितीय माध्य है।

'मानव विकास सूचकांक' की परिभाषा [Definition of 'Human Development Index'] [In Hindi]

मानव विकास सूचकांक (HDI) एक सांख्यिकीय उपकरण (Statistical Tools ) है जिसका उपयोग किसी देश की सामाजिक और आर्थिक आयामों में समग्र उपलब्धि को मापने के लिए किया जाता है। किसी देश के सामाजिक और आर्थिक आयाम लोगों के स्वास्थ्य, उनकी शिक्षा प्राप्ति के स्तर और उनके जीवन स्तर पर आधारित होते हैं। Gross Domestics Savings क्या है?

पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक ने 1990 में एचडीआई बनाया था जिसका इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा देश के विकास को मापने के लिए किया गया था। सूचकांक की गणना चार प्रमुख संकेतकों को जोड़ती है: स्वास्थ्य के लिए जीवन प्रत्याशा, स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष, शिक्षा के लिए स्कूली शिक्षा के वर्ष और जीवन स्तर के लिए प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय।

यूएनडीपी हर साल अपनी वार्षिक रिपोर्ट में जारी एचडीआई रिपोर्ट के आधार पर देशों की रैंकिंग करता है। किसी देश के विकास के स्तर पर नज़र रखने के लिए एचडीआई सबसे अच्छे साधनों में से एक है, क्योंकि यह सभी प्रमुख सामाजिक और आर्थिक संकेतकों को जोड़ता है जो आर्थिक विकास के लिए जिम्मेदार हैं।

मानव विकास सूचकांक क्या होता है

मानव विकास को मानव विकास सूचकांक (Human Development Index, HDI) के रूप में मापा जाता है. इसे मानव विकास की आधारभूत उपलब्धियों पर निर्धारित एक साधारण समिश्र सूचक (composite indicator) के रूप में मापा जाता है और विभिन्न देशों द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संसाधनों तक पहुँच के क्षेत्र में की गई उन्नति के आधार पर उन्हें श्रेणी (rank) प्रदान करता है. यह श्रेणी 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है, जो एक देश, मानव विकास के महत्त्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकॉर्ड से प्राप्त करता है. मानव विकास सूचकांक UNDP (United Nation Development Programme) द्वारा नापा जाता है. UNDP का headquarter न्यूयॉर्क में है. इसकी स्थापना 1965 को हुई थी. चलिए जानते हैं मानव विकास सूचकांक क्या होता है और इसको मापने के लिए किन पैमानों (measures) का प्रयोग किया जाता है?

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य के सूचक को निश्चित करने के लिए जन्म के समय जीवन-प्रत्याशा को चुना गया है. इसका अर्थ यह है कि लोगों को लम्बा एवं स्वास्थ्य जीवन व्यतीत करने का अवसर मिलता है. जितनी उच्च जीवन-प्रत्याशा होगी, उतनी ही अधिक विकास का सूचकांक (HDI) होगा.

शिक्षा

यहाँ पर शिक्षा का अभिप्राय प्रौढ़ साक्षरता दर तथा सकल नामांकन अनुपात से है. इसका अर्थ यह है कि पढ़ और लिख सकने वाले वयस्कों की संख्या तथा विद्यालयों में नामांकित बच्चों की संख्या अधिक होने से सूचकांक (index) में वृद्धि होती है.

संसाधनों तक पहुँच

संसाधनों तक पहुँच को करी शक्ति (अमेरिकी डॉलर में) के सन्दर्भ में मापा जाता है.

सूचकांक निर्मित करने के लिए प्रत्येक सूचक के लिए सर्वप्रथम न्यूनतम तथा अधिकतम मान निश्चित कर लेते हैं:

जन्म के समय जीवन प्रत्याशा: 25 वर्ष और 85 वर्ष

सामान्य साक्षरता दर: 0 प्रतिशत और 100 प्रतिशत

प्रतिव्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (PPP)

$100 अमेरिकी डॉलर और $40, 000 अमेरिकी डॉलर. इनमें से प्रत्येक आयाम को 1/3 भारिता (weights) दी जाती है. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) इन सभी आयामों को दिए गए weights का कुल योग होता है. स्कोर, 1 के जितना निकट होता है, मानव विकास का स्तर उतना ही अधिक होता है. इस प्रमुख संकेतक और सूचकांक प्रकार 0.983 का स्कोर अति उच्च स्तर का, जबकि 0.268 मानव विकास का अत्यंत निम्न स्तर माना जायेगा.

2015 में भारत ने 130वाँ स्थान लाया और भारत का स्कोर था – – 0.609. Norway ने 1st rank, Australia ने 2nd रैंक और Switzerland 3rd स्थान प्राप्त किया.

प्राप्तियाँ और कमियाँ (Attainment and Shortfalls)

मानव विकास सूचकांक (HDI) मानव विकास में प्राप्तियों एवं कमियों को मापता है.

प्राप्तियाँ (ATTAINMENTS):

प्राप्तियाँ मानव विकास के प्रमुख क्षत्रों में की नई उन्नति की सूचक हैं. ये सर्वाधिक विश्वनीय माप नहीं है, क्योंकि ये वितरण (distribution) के सम्बन्ध में कोई सूचना नहीं देती.

कमियाँ (SHORTFALLS):

मानव गरीबी सूचकांक, मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) से सम्बंधित है और मानव विकास में कमियों को मापता है. इनमें कई पक्षों को सम्मिलित किया जाता है, जैसे – 40 वर्ष कम आयु तक जीवित न रह पाने की संभाव्यता (feasibility), प्रौढ़ निरक्षरता दर (adult illiteracy rate), स्वच्छ जल तक पहुँच न रखने वाले लोगों की संख्या और अल्प्भार वाले छोटे बच्चों की संख्या (number of underweight children) आदि. मानव विकास सूचकांक इन पैमानों (measures) द्वारा संयुक्त अवलोकन कर के किसी देश में मानव विकास की स्थिति का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है|

असमानता सूचकांक में भारत ने छह रैंक की छलांग लगाई

नॉर्वे शीर्ष पर, उसके बाद जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया 161 देशों की सरकारी नीतियों

असमानता सूचकांक में भारत ने छह रैंक की छलांग लगाई

भारत ने असमानता की खाई पाटने में प्रगति की है। भारत ने 161 देशों की 'असमानता सूचकांक में कमी लाने की नवीनतम प्रतिबद्धता' (सीआरआईआई) में छह पायदान का सुधार कर 123 वां स्थाना प्राप्त किया है। हालांकि, स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च के मामले में भारत सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में बना हुआ है।

सीआरआईआई-2022 में कोविड-19 महामारी के दौरान असमानता कम करने के लिए 161 देशों की सरकारी नीतियों और कार्यों की समीक्षा की गई है। इस सूची में नॉर्वे शीर्ष स्थान पर है और उसके बाद जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया का स्थान है। भारत की रैंकिंग में वर्ष 2020 के 129 स्थान के मुकाबले छह पायदान का सुधार हुआ है और वर्ष 2022 में उसे 123वां स्थाना मिला है। वहीं, असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील व्यय के मामले में भारत ने 12 पायदानों का सुधार कर 129वां स्थान प्राप्त किया है। प्रगतिशील कर प्रणाली के मामले में भारत ने अपनी स्थिति तीन पायदान मजबूत कर 16वां स्थान प्राप्त किया है। न्यूनतम वेतन के मामले में भारत 73वें पायदान फिसल गया है क्योंकि उसे उन देशों की सूची में शामिल किया गया है जहां पर राष्ट्रीय तौर पर न्यूनतम वेतन तय नहीं किया गया है। असमानता कम करने के लिए सरकारी खर्च के प्रभाव के मामले में भारत की रैंकिंग में 27 पायदानों का सुधार हुआ है जबकि 'असमानता कम करने के लिए कर प्रणाली के प्रभाव' के मामले में भारत ने 33 पायदान का सुधार किया है।

इस सूचकांक को ऑक्सफैम इंटरनेशनल ऐंड डेवलपमेंट फाइनेंस इंटरनेशनल (डीएफआई) तैयार करता है। वह इस सूचकांक को तैयार करने के लिए सरकार की नीतियों और तीन क्षेत्रों में किए गए कार्यों की समीक्षा करता है जिसका प्रभाव असमानता कम करने के मामले में साबित हो चुका है। सूचकांक तैयार करने के लिए तीन क्षेत्रों को संज्ञान में लिया जाता है, जिनमें सार्वजनिक सेवा (स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा), कर और कर्मचारियों के अधिकार शामिल हैं।

स्वास्थ्य में सुधार की जरूरत

ऑक्सफैम ने सूचकांक के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जिन्होंने फिर से स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च में बहुत कम प्रदर्शन किया। सूचकांक दिखाता है कि भारत की रैंकिंग में दो पायदान की गिरावट आई है और वह 157वें स्थान पर फिसल गया है। इस प्रकार से वह दुनिया के उन देशों में पांचवे स्थान पर है जिनका प्रदर्शन इस क्षेत्र में सबसे खराब है। भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने कुल खर्चों का 3.64 प्रतिशत खर्च कर रहा है जो ब्रिक्स (ब्राजील, चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका) देशों और पड़ोसी देशों में सबसे कम है। चीन अपने खर्च का 10 प्रतिशत, ब्राजील 7.7 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका अपने खर्च का सबसे अधिक 12.6 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करता है।

Human Development Index in Hindi | मानव विकास सूचकांक | Full form of HDI

मानव विकास सूचकांक विश्व के विभिन्न देशों में मानव के विकास की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करता है। इसके द्वारा मानव की बुनियादी अनिवार्य आव श्यकताओं के संदर्भ में मानव विकास को निर्धारित किया जाता है तथा विश्व के विभिन्न देशों में मानव विकास की स्थिति का आंकलन किया जाता है।

विश्व के मानव विकास सूचकांक (HDI) को निर्धारित करने का कार्य संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा किया गया है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) प्रत्येक वर्ष विश्व के विभिन्न देशों के बीच मानव विकास की स्थिति का निर्धारण मानव विकास सूचकां क के द्वारा करता है। साथ ही मानव विकास की दृष्टि से पिछड़े देशों को सहायता प्रदान करता है।

मानव विकास के लिए सलाह या परामर्श तथा मानव विकास सूचकांक के निर्धारण में मुख्यतः निम्न आधार अपनाए जाते हैं।

  1. जीवन प्रत्याशा
  2. शिक्षा का स्तर
  3. प्रतिव्यक्ति वास्तविक आय
  1. उच्च मानव विकास श्रेणी – इसमें वैसे देश सम्मिलित किए जाते हैं, जि नका HDI मूल्य 0.8 से अधिक होता है। जैसे – नॉर्वे (प्रथम) उसके बाद आयरलैंड, स्विट्जरलैंड, हांगकांग और आइसलैंड को जग ह मिली।
  2. मध्यम मानव विकास श्रेणी – इसमें वैसे देश सम्मिलित किए जाते हैं जिन का HDI मूल्य 0.5 से 0.8 के बीच होता है। जैसे – वियतनाम, ईराक, नामिबिया, भारत, भूटान और बांग्लादेश।
  3. निम्न मानव विकास श्रेणी – इसमें वैसे देश सम्मिलित किए जाते हैं। जिनका HDI मूल्य 0.5 से कम होता है। जैसे – युगांडा, रवांडा, नाइजीरिया, चाड, माली, इरिट्रिया, सूडान, यमन, इथोपिया और लीबिया।

HDI का विकास पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक द्वारा किया गया था। इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रकाशित किया गया हैं। मानव विकास रिपोर्ट तैयार करने के लिए, महबूब उल हक ने पॉल स्ट्रीटन, शशांक जायसवाल, फ्रैन्सस स्टीवर्ट, गुस्ताव रानीस, कीथ ग्रिफिन, सुधीर आनंद और मेघनाद देसाई सहित विकास अर्थशास्त्रियों के एक समूह का गठन किया। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने मानव क्षमताओं पर अपने काम में हक के काम का इस्तेमाल किया। मानव विकास सूचकांक को मापने की निम्नलिखित विधि है।

  • LRI – जीवन प्रत्याशा सूचकांक,
  • EAI – शिक्षा प्राप्ति का सूचकांक
  • SLI – जीवन स्तर का सूचकांक

मानव विकास रिपोर्ट 2005 :

UNDP द्वारा जारी वार्षिक मानव विकास रिपोर्ट 2005 विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर केंद्रित है। इसी रिपोर्ट से पता चलता है कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास की गति धीमी हुई है। इसमें वैश्विक आर्थिक विषमता पर चिंता जताते हुए बताया गया है कि गरीबों एवं अमीरों के बीच की खाई निरंतर चौड़ी होती जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि $1 प्रतिदिन से कम पर जीवन यापन करने वाले एक अरब लोगों को गरीबी रेखा के ऊपर रखने के लिए 300 अरब डॉलर व्यय की आवश्यकता है। पुनः शिशु मृत्यु दर में गरीब तथा अमीर देशों के बीच अंतर बढ़ा है।

  • उप-सहारा अफ्रीकी प्रदेश में शिशु मृत्यु प्रमुख संकेतक और सूचकांक दर 1980 में विकसित देशों का 13 गुना थी, जो वर्तमान में 29 गुना हो गई है। पुनः कुछ विकासशील देश जैसे चीन एवं भारत ऐसे हैं, जहां राष्ट्रीय आय में वृद्धि हुई है। लेकिन शिशु मृत्यु दर में कमी नहीं आई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में 189 देशों में मानव विकास सूचकांक की सूची में भारत का स्थान 131वां, भूटान 129वें, बांग्लादेश 133वें, नेपाल 142वें तथा पाकिस्तान 154वें स्थान पर रहा।
  • PHDI को शामिल करने के बाद, 50 से अधिक देश उच्च मानव विकास समूह’ से बाहर हो गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे जीवाश्म ईंधन और भौतिक पदचिह्न पर अत्यधिक निर्भर हैं।
  1. भारत का मानव विकास रिपोर्ट – UNDP के तर्ज पर भारत ने मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित करना प्रारंभ किया है। सर्वप्रथम 2002 में भारत की मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। इस रिपोर्ट में मानव विकास सूचकांक तथा मानव निर्धनता सूचकांक तैयार किया गया है।
  2. मानव विकास सूचकांक – इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सूचक सम्मिलित है। शिक्षा को साक्षरता दर, विद्यालय में बिताए गए औसत वर्ष, जैसे उपसूचकों से परि भाषित किया गया है। स्वास्थ्य को शिशु मृत्यु दर, 1 वर्ष की उम्र में जीवन संभावना दर, जैसे उपसूचकों से तथा आर्थिक सूचक को प्रतिव्यक्ति व्यय जैसे उप-सूचकों से परिभाषित किया गया है।
  3. मानव निर्धनता सूचकांक – इसमें निर्धनता के साथ-साथ, आवास, आस-पास का वातावरण, मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच के उप-सूचक का प्रयोग किया गया है।

उपरोक्त सूचकांकों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि 1980 के दशक में समग्र मानव विकास वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत वार्षिक रही। जो 1990 के दशक में बढ़कर 3 प्रतिशत वार्षिक हो गई। रिपोर्ट में कहा गया कि उदारीकरण के दौर में पिछले 10 वर्षों में देश के समग्र विकास सूचकांक में बेहतर सुधार हुआ है। निर्धनता सूचकांक के अंतर्गत 1983 में 47 प्रतिशत, 1993-94 प्रमुख संकेतक और सूचकांक में 39 प्रतिशत तथा वर्तमान में लगभग 27 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे थी।

महिला पुरुष अनुपात में मामूली सुधार की बात भी कही गई है। जहां तक व्यय का सवाल है तो ग्रामीण जनता की व्यय क्षमता में कमी आई है, जबकि शहरी क्षेत्र में जनता के व्यय क्षमता में वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिव्यक्ति उपभोक्ता व्यय पंजाब, हरियाणा, केरल एवं राजस्थान में राष्ट्रीय स्तर से अधिक है।

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