Share कब खरीदना और बेचना चाहिए? (7 आसान तरीकों से पता करें)

आज के समय में हर किसी की रुचि शेयर मार्केट में बढ़ती जा रही है। लोग पैसे बैंक में जमा कराने की बजाय या FD, mutual fund, gold आदि में invest करने की बजाय शेयर मार्केट में निवेश करना अधिक पसन्द कर रहे हैं।

यदि आप शेयर मार्केट में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो आपको यह ज्ञान होना जरूरी है कि आपको कौन सा share अपने portfolio टेक्निकल एनालिसिस अब हुआ आसान मे रखना चाहिए। तभी आप शेयर मार्केट से मुनाफा कमा सकते हैं।

इसीलिए आज का हमारा यह post share के buy, sell से संबंधित है। हमारे इस post का विषय है कि हमे अपने शेयर कब खरीदना और बेचना चाहिए.

Share खरीदते या बेचते समय सावधानी रखनी योग्य बातें

यदि आप शेयर मार्केट में beginner है तो आपको सबसे पहले share market सीखने का कार्य करना चाहिए। अक्सर लोग जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में लोगों की दी गई सलाह के अनुसार पैसा invest कर देते हैं और नुकसान उठा लेते हैं।

यहां तक कि कुछ लोगों को तो बिल्कुल भी मालूम नहीं होता कि शेयर मार्केट काम कैसे करता है और वह भी पैसा कमाने की रेस में शेयर मार्केट में कूद जाते हैं और पैसा गवा लेते हैं।

जिस तरह से असल दुनिया में भी बाजार के कायदे कानून होते हैं उसी तरह से शेयर मार्केट के भी कुछ अपने नियम होते हैं यदि आप उन्हे follow नहीं करते तो आपको गारंटी नुकसान होता है।

कई बार आपको किसी शेयर में पैसा invest करने की सलाह दी जाती है क्योंकि उसने पिछले कुछ महीनों में 300 से 400 % या इससे भी अधिक रिटर्न दिया हो, परंतु इस बात की क्या गारंटी होती है कि वह आने वाले समय में भी लाभ ही देगा।

यदि कोई शेयर लाभ देता है तो उसके पीछे उस कंपनी की तरफ से कोई अच्छी खबर होती है, जिसकी वजह से वह लगातार कुछ समय से अच्छा return दे रही होती है। जिस स्थिति में उस कंपनी का शेयर price अचानक बढ़ जाता है परंतु इसके विपरीत यदि कोई पूरी खबर आती है तो कंपनी का price नीचे भी चला जाता है।

इसीलिए नए investor को यह जरूर ensure करना चाहिए के जिन shares पर आप पैसा invest करने वाले हैं क्या वह आपके लिए फायदेमंद है या नहीं।

आपको किसी अच्छे adviser की सलाह के बिना कभी भी पैसा invest नहीं करना चाहिए या फिर स्वयं शेयर मार्केट सीखना चाहिए।

Share को कब खरीदना चाहिए?

एक सफल investor वारेन बफेट बताते हैं कि किसी भी investor को शेयर उस समय खरीदना चाहिए जब पूरा stock market डरा हुआ हो और उस समय बेच देना चाहिए, जब पूरा मार्केट लालच से भरा हो।

उनके कहने का तात्पर्य है कि जब मार्केट गिर रहा हो तो आपको उस समय लालची बन जाना चाहिए और जब market लालची हो तब आपको डरना चाहिए।

आइए अब हम आपको कुछ तरीके बताते हैं जिनसे आपको किसी share को खरीदने और बेचने में मदद मिलेगी।

1) Company के factors check करे

यदि आप technical research नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि किसी भी शेयर को खरीदने से पहले हमें उस कंपनी के शेयर के कई factors देखने पड़ते हैं। जैसे:-

  • कंपनी का business model क्या है और कंपनी कैसे पैसे कमाती है।
  • Company का business कैसा चल रहा है।
  • Company के ऊपर debt कितना है।
  • Company का management कैसा है।
  • क्या company लिए हुए कर्ज का भुगतान समय पर कर रही है?
  • कंपनी एक्सचेंज में registered होने के बाद में निवेशकों को कितना return दे चुकी है।
  • क्या कंपनी उसी सेक्टर की अन्य कंपनियों से compete कर सकती है।
  • उस कंपनी के future plan क्या है।

ऊपर बताए गए सवालों के जवाब को शेयर खरीदने से पहले जरूर पता कर ले यहां fundamental research के तहत आता है।

2) Technical research के आधार पर

शेयर को कब खरीदना चाहिए या बेचना चाहिए इस बात को ensure करने के लिए technical research काफी मददगार होता है। किसी भी कंपनी के शेयर की chart reading करने पर यह बता चलता है कि कंपनी ने अपना अधिकतम मूल्य या न्यूनतम मूल्य कब टच किया था।

जिसके आधार पर यह निर्णय लिया जा सकता है कि शेयर का price अभी सस्ता है या महंगा। Technical analysis मे भी काफी सारी चीजे होती है जो आपको share खरीदने या बेचने मे मददगार होती है। जैसे:- trend line, moving average, candle pattern etc.

3) जब share की value वास्तविक कीमत से कम हो

यदि किसी शेयर की कीमत उसकी वास्तविक कीमत से कम है तो वह शेयर खरीदने के लिए एक उत्तम समय होता है। Undervalued शेयर को खरीदने से आप वाकई में अच्छा profit कमा सकते हैं।

इसके विपरीत, यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि सबसे सस्ते शेयर खरीदने के चक्कर में penny stock में भी लोग फंस जाते हैं और यह आगे चलकर नुकसान ही देता है। इसीलिए आपको ना तो सबसे ज्यादा return देने वाले शेयर में फसना चाहिए और ना ही सबसे सस्ते शेयर में, क्योंकि इस तरह के शेयर जितनी तेजी से profit देते हैं उतनी ही तेजी से कंगाल भी कर देते हैं।

4) Company के quarterly result के अनुसार

जो भी कंपनी एक्सचेंज पर registered होती है वह हर 3 महीने बाद अपनी कंपनी के result पेश करती है जिसमें कंपनी का revenue, expense और net profit जैसी चीजें बताई जाती है। यदि quarterly result अच्छे हैं तो आपको शेयर खरीदना चाहिए, परंतु यदि कंपनी के quarterly result अच्छी नहीं है तो आप को शेयर को खरीदने से बचना चाहिए।

5) IPO के समय

जब कंपनी अपना business बढ़ाना चाहती हो तो वह पूंजी इकठा करने के लिए एक्सचेंज पर अपनी कंपनी को registered करके IPO launch करती है। परंतु जरूरी नहीं है कि IPO के बाद उस कंपनी के शेयर का भाव बढ़ेगा। कभी कभी यह अच्छा listing gain कर लेती है तब निवेशक को फायदा हो जाता है और कभी-कभी इसे बिल्कुल भी listing gain नहीं मिलता इस समय निवेशक घाटा खाता है।

6) Market का overbought या oversold zone

जब भी मार्केट overbought जोन में होती है तो उस समय share बेचने के लिए एक अच्छा समय रहता है और जब मार्केट oversold जोन में रहती है तो वह एक शेयर buy करने के लिए अच्छा opportunity होती है।

7) Share market के crash होने पर

जब भी बाहर शेयर मार्केट crash होती है तो लोग अपना portfolio बेचने लगता है। परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। उस समय अपना portfolio मे अच्छे शेयर को जरूर add करना चाहिए, क्योंकि जब मार्केट recover करती है तो यह काफी अच्छा profit छोड़ जाती है।

निष्कर्ष

दोस्तों, आज के इस post में हमने आपको शेयर कब खरीदना और बेचना चाहिए? इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी है। आशा करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि इस post से संबंधित कोई भी सवाल आप हम से पूछना चाहते हैं तो हमें कमेंट box में कॉमेंट कर के पूछ सकते है।

Trading Kya Hoti Hai ?

हम अक्सर स्टॉक मार्केट में Trading के बारे में सुनते हैं।
कितने लोग Trading करके लाखों में प्रॉफ़िट्स कमा लेते हैं।
वहीं कितनो को लॉस भी होता है।
तो आखिर Trading होता क्या है?
ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट में क्या फर्क है?
ट्रेडिंग के कितने टाइप्स होते हैं?
और क्या ट्रेडिंग से रेगुलर इनकम कमाया जा सकता है?
आज हम इस Post में इन सारे सवालों के जवाब जानेंगे।

नमस्कार दोस्तों,
स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग Me
जो इंवेस्टिंग पर बेस्ड है।
अगर आप इंवेस्टिंग मे इंट्रेस्टेड हैं। इंवेस्टिंग सीखना चाहते हैं
तो Bell Notification on करें।
आईये चलते हैं पहले सवाल पर।
ट्रेडिंग क्या होता है?
दोस्तों ट्रेडिंग को हिंदी में व्यापार बोलते हैं। जिसका मतलब होता है किसी चीज़ को खरीदना और फिर उसे बढ़े हुए दाम पर बेचना ताकि प्रॉफिट हो सके।
ठीक इसी तरह स्टॉक मार्केट में शेयर्स को बाय करना और जैसे ही उस शेयर की प्राइस बढ़ जाये उसे बेच कर प्रॉफिट कमाने को ही हम स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग कहते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि इन्वेस्टमेंट में भी तो यही होता है। तो दोस्तों आप सही भी हैं और नही भी। आईये चलते हैं दूसरे सवाल पर ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट में क्या फर्क है?
दोस्तों इन्वेस्टमेंट में हम शेयर्स को लंबे समय तक होल्ड करते हैं। जैसे 1 साल, 5 साल या 10 साल।
लेकिन ट्रेडिंग में हम शेयर्स को बहुत कम समय तक होल्ड करते हैं। जैसे 1 मिनट, 1 घंटा या कुछ महीने।
इन्वेस्टमेंट में हम ध्यान से अच्छी कंपनियों के शेयर्स को बाय करते हैं। क्योंकि हम इन्वेस्टमेंट में कंपनियों के शेयर्स को लंबे समय तक होल्ड करते हैं।
जबकि ट्रेडिंग में हम बिना कंपनी की डिटेल्स जाने बस प्राइस देख कर शेयर्स बाय करते हैं।
क्योंकि ट्रेडिंग में हमे बस प्राइस के मूवमेंट से मतलब होता है। और जैसे ही प्राइस बढ़ती है, हम शेयर को बेचकर प्रॉफिट कमा लेते हैं।
इन्वेस्टमेंट में पैसे लंबे समय मे बनते हैं। पर रिस्क कम होता है। क्योंकि हम अच्छी कंपनियों के शेयर्स को बाय करते हैं।
वहीं ट्रेडिंग में पैसे बहुत जल्दी बन जाते हैं। पर यहाँ रिस्क थोड़ा ज्यादा होता है। क्योंकि प्राइस की मूवमेंट शॉर्ट टर्म में रैंडम होती है।
दोस्तों, इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग में सबसे बड़ा फर्क नज़रिये का होता है।
अगर हमने किसी कंपनी को स्टडी करके, उसके बिज़नेस को समझकर और ये सोचकर शेयर्स बाय किया है कि कंपनी लंबे समय में बहुत ग्रो करेगी
तो हम इसे इन्वेस्टमेंट कहेंगे। और अगर हमने किसी कंपनी के शेयर्स बिना कंपनी को स्टडी किये बस प्राइस के पैटर्न्स को देखकर किया है
ताकि जैसे ही प्राइस बढ़े हम उसे बेच कर प्रॉफ़िट्स कमा लें, तो हम इसे ट्रेडिंग कहेंगे।
दोस्तों, कंपनीयों को ध्यान से स्टडी करना और उसके बिज़नेस को समझने को हम फंडामेंटल एनालिसिस कहते हैं। और हमे इन्वेस्टमेंट करने से पहले कंपनी का फंडामेंटल एनालिसिस ज़रूर करना चाहिए पर अगर हम
बस कंपनियों के शेयर्स के प्राइस को स्टडी करते हैं और उसके पैटर्न को प्रेडिक्ट करने की कोशिश करते हैं तो हम इसे टेक्निकल एनालिसिस कहते हैं।
और हमे ट्रेडिंग करने से पहले शेयर्स का टेक्निकल एनालिसिस ज़रूर करना चाहिए। अगर आपको फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस के बारे में पता नही है
तो हमने इनके ऊपर एक वीडियो बनाया हुआ है। आप उस वीडियो को ज़रूर देखें।
आईये अब चलते हैं तीसरे सवाल पर। ट्रेडिंग के कितने टाइप्स होते हैं?
दोस्तों, ट्रेडिंग में बेसिकली 4 टाइप्स होते हैं। पहले टाइप के ट्रेडिंग को हम स्कैल्पींग कहते हैं।
इस तरह के ट्रेडिंग में हम शेयर्स को कुछ मिनट्स के लिए बाय करते हैं। और जैसे ही प्राइस थोड़ी सी भी बढ़ती है हम उसे बेचकर प्रॉफ़िट्स कमा लेते हैं। एग्जाम्पल के लिए अगर हम एक कंपनी के 10 हज़ार शेयर्स 100 रुपये के प्राइस पर बाय करें और कुछ मिनट्स बाद जब शेयर्स की प्राइस 100 रुपये से बढ़कर 100.50 रुपये हो जाये
तो उसे बेचकर 5000 रुपये का प्रॉफिट कमा लें तो इसे हम स्कैल्पींग कहेंगे।
दूसरे टाइप के ट्रेडिंग को हम इंट्राडे ट्रेडिंग कहते हैं। इस तरह की ट्रेडिंग में हम शेयर्स को कुछ घंटों के लिए रखते हैं। और सेम डे, मार्केट क्लोज होने से पहले तक शेयर्स को सेल करके प्रॉफिट कमाते हैं। तीसरी टाइप की ट्रेडिंग को हम स्विंग ट्रेडिंग कहते हैं।
इस तरह की ट्रेडिंग में हम शेयर्स को कुछ दिनों तक होल्ड करते हैं। और एक या दो वीक्स के अंदर शेयर्स को सेल करके प्रॉफ़िट्स कमाते हैं। और चौथे टाइप के ट्रेडिंग को हम पोजीशन ट्रेडिंग कहते हैं। इस तरह के ट्रेडिंग में हम शेयर्स को कुछ वीक से लेकर कुछ मन्थ्स तक होल्ड करते हैं।
और फिर उनको सेल करके प्रॉफिट कमाते हैं।
दोस्तों, अब हम आ गए हैं अपने आख़िरी सवाल पर। क्या ट्रेडिंग से रेगुलर इनकम कमाया जा सकता है?
दोस्तों, ट्रेडिंग से रेगुलर इनकम कमाना बिल्कुल पॉसिबल है। पर आसान नहीं। ट्रेडिंग से रेगुलर इनकम कमाने के लिए हमे सबसे पहले पैसो की ज़रूरत होगी। क्योंकि ट्रेडिंग में अगर हम प्राइस की छोटी मूवमेंट से अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं
तो हमे ज्यादा शेयर्स लेने पड़ेंगे। जिसके लिए हमे ज्यादा पैसो की ज़रूरत पड़ेगी। पैसो के साथ-साथ हमे टेक्निकल एनालिसिस की अच्छी नॉलेज होनी चाहिए।
तभी हम प्राइस के पैटर्न को समझ सकेंगे। और सही टाइम पर शेयर्स को बाय या सेल कर पाएंगे। इसके साथ-साथ हमे लॉस को कम से कम रखने के लिए स्टॉपलॉस के यूज़ को अच्छे से समझना होगा। स्टॉपलॉस के ऊपर हमने अलग से एक वीडियो बनाया हुआ है
आप उस वीडियो को ज़रूर देखें। और दोस्तों ट्रेडिंग में सबसे इम्पॉर्टेन्ट है लगातार अपनी गलतियों से सीखना।
और हार ना मानना। क्योंकि हर सक्सेसफुल ट्रेडर सक्सेसफुल तभी होता है जब वो लगातार अपनी ट्रेडिंग को अच्छा करता जाता है। तो अगर आप भी एक सफल ट्रेडर बनना चाहते हैं तो इन सारे पॉइंट्स को अच्छे से फॉलो करें।
तो दोस्तों, ये था हमारा आज का Post ट्रेडिंग के ऊपर।
इसमे हमने जाना कि ट्रेडिंग क्या होता है?
ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट में क्या फर्क है?
ट्रेडिंग के कितने टाइप्स होते हैं?
और क्या ट्रेडिंग से रेगुलर इनकम कमाया जा सकता है?

एक अच्छा investore कैसे बने

शेयर मार्केट निवेसिको के लिए जोखिम के साथ राहत भी है

Be a good investor : Hello, दोस्तों 😊आज हम जानेंगे की एक अच्छा investor टेक्निकल एनालिसिस अब हुआ आसान कैसे बने | दोस्तों मैं आपको एक बात बता दू किसी काम में expart होने के लिए आपको उस चीज के बारे में पूरी जान कारी लेनी होगी | और आपको रेगुलर होना पड़ेगा |

अगर आप एक expart invester बनने में रूचि रखते है तो सबसे पहले आपको उससे जुड़ी बेसिक जानकारी रखनी होगी | दोस्तों इसके लिए हम जानते है investment के कुछ रूल |

स्टॉक मार्किट कैसे काम करता है|

NSE और BSE क्या है? और इनके क्या काम है

शेयर मार्केट में पैसे कैसे इन्वेस्ट करें पता करे

SIP Investment vs Lump Sum

निफ्टी और सेंसेक्स क्या है और ये कैसे काम करता है पूरी जानकारी रखे

किसी भी स्टॉक मार्किट का Fundamental Analysis कैसे करे

किसी भी स्टॉक मार्किट का Technical Analysis कैसे करे

1.दोस्तों शेयर या स्टॉक मार्किट डिजिटल रूप है इलेक्ट्रॉनिक device द्वारा काम किया जाता है | इसमें हम किसी कंपनी के शेयर खरीदते है | BSE और NSE में जो Company लिस्टेड रहती है उसके Share किसी ब्रोकर के माध्यम से ख़रीदे व बेचे जाते है |

दोस्तों मानले अगर आपने किसी कंपनी का शेयर ले रखा है और कंपनी में किसी तरह की प्रॉब्लम आ गई तो और उसका शेयर गिर गया तो उस कंपनी के शेयर खरीदने वाले को नुकसान का सामना करना परता है |

इसमें कुछ अच्छी खबर भी होती है कुछ लोग इसके शेयर सस्ते में खरीद सकते है |और फिर कंपनी की प्रोब्लेम सही होने पे उस कंपनी के शेयर तेजी से उप्पर इनक्रीस होते है |

2. दोस्तों आइये जानते है शेयर मार्किट में पैसा कैसे लगाना है सबसे पहले तो दोस्तो आप किसी company का शेयर खरीदने वा बेचने की जल्दबाजी बिलकुल भी न करे ।

Ad 10

दोस्तो market में अनुशासन बहुत जरूरी है कई investor stock market में उतार चढाव के कारण अपनी कमाई डूबा देते है

Ad 7

दोस्तों आप शेयर मार्केट के शेयर के प्रति अपना नजरिया नियंत्रित रखे आप हाई return की उम्मीद बिलकुल भी न रखे। इससे शेयर का रेट कम हो जाए तो आपको दुख न हो ।

दोस्तों आप सरप्लस फंड ही उपयोग में लाए अर्थात् सारे खर्चों के बाद बचा हुआ धन ही share market में लगाए।जिससे अच्छा return मिलने पे उसी पैसे को उसे पैसे को आप फिर से अपयोग कर सके।

दोस्तो अब आइए जानते है । SIP V/S LUMP SUM दोस्तो ये सब तरीके होते है की आप कौनसे तरीके से पैसा लगाए जिससे आपका पैसा सुरक्षित रहे । जैसे की mutual found में पैसा लगाना आसान हैं लेकिन किस तरीके से लगाए।

आइए हम जानते है । SIP systematic investment plan हैं जो की एक प्लानिंग के तहत् mutual found में invest करने का तरीका बताता है । और वही LUMP SUM तरीके से आप तभी invest करे जब आपके पास लगाने के लिए बहुत पैसा हो । और SIP तब अपनाए जब आप एकदम sure हो कि आप हर महीने fixed amount invest कर सकते हो |

3.जब निष्पक्षत रूप से स्टॉक की बात होती है तो दो मुख्य स्टॉक एक्सचेंज याद आते है | BSE – Bombay Stock Exchange जब की दूसरा है NSB – National stock Exchange ये भारत के सबसे बढे और एशिया ,जापान ,चीन के बाद सबसे बड़े stock Exchange है।

NSE 1992 में शुरु हुआ यह stock market के मामले में भारत का सबसे बड़ा stock exchange है इससे पूरी तरह से कागज पे आधारित stock trading से राहत मिली ।

यह benchmark index bhi होता है जिसे Nifty भी कहा जाता है। इसमें 50 अधिक कारोबार वाली company listed होती है। इसे nfty 50 भी कहा जाता है।

इन सबके अलावा BSE जो की 1875 मे the native share और ब्रॉकर एसोसिएट से शुरु किया गया था। इसका भी अपना benchmark index होता है इसे सेंसेक्स भी कहा जाता है जो की electronic treding में बदल गया।

मूलतः इसमें ओसत से उप्पर कारोबार करने वाली 30 company को लिस्ट किया गया है।

Be a good investor : दोस्तों बस मैं इतना कहना चाहूंगा कि stock में invest करने से पहले अच्छी तरह से जानकारी ले ले।

सीयूईटी यूजी परीक्षा के दौरान परेशान दिखे छात्र, पेपर तो आसान था लेकिन सर्वर की रही दिक्कत

CUET यूजी पहले दिन की परीक्षा समाप्त हो चुकी है. पहले दिन स्टूडेंट्स को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. हालांकि जिन स्टूडेंट्स ने पेपर दिया उन्होंने बताया कि पेपर काफी आसान था.

सीयूईटी यूजी परीक्षा के दौरान परेशान दिखे छात्र, पेपर तो आसान था लेकिन सर्वर की रही दिक्कत

सीयूईटी यूजी फेज 2 की पहले दिन की परीक्षा समाप्त हो चुकी है. इस परीक्षा में लाखों स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. CUET 2022 चरण 2 परीक्षा में लगभग 14,90,000 उम्मीदवार शामिल हुए. इस परीक्षा में काफी स्टूडेंट्स को टेक्निकल दिक्कतों का सामना करना पड़ा. वहीं कई उम्मीदवारों को लास्ट मोमेट पर पता चला कि परीक्षा उनकी परीक्षा रद्द कर दी गई है. जिन स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी उनके रिएक्शन सामने आए हैं. उन्होंने बताया कि परीक्षा कैसा था. छात्रों ने सीयूईटी परीक्षा के पहले चरण को आसान बताया है. उम्मीदवारों को अंग्रेजी की परीक्षा आसान लगी और भले ही गणित का सेक्शन थोड़ा लंबा था, लेकिन सीधा था.

CUET एग्जाम का पेपर काफी आसान रहा

वहीं इतिहास के पेपर में कारणों पर छात्रों का परीक्षण करने वाले प्रश्न शामिल थे और उनसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए कहा गया था. समाजशास्त्र के पेपर में ऐसे पैसेज शामिल थे जिनके आधार पर छात्रों को सवालों के जवाब देने होते थे.कई छात्रों ने बताया कि वे अपनी सीयूईटी यूजी चरण II परीक्षा (सुबह स्लॉट) में सामान्य परीक्षा सेक्शन देने में असमर्थ थे जो आज सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित की गई थी. अभ्यर्थियों ने कहा कि सर्वर की कई समस्याएं थीं, जिसके कारण उनकी स्क्रीन पर कोई प्रश्न नहीं आया. सरकारी नौकरी सिधी भर्ती 2022 की पूरी जानकारी यहां.

जनरल टेस्ट का पेपर बहुत स्टूडेंट्स ने नहीं दिया

कुछ छात्रों ने अपनी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के एक ही दिन होने की शिकायत की, लेकिन एनटीए ने छात्रों से उन्हें मेल करने के लिए कहा और कुछ बदलावों पर विचार किया गया है. वहीं एक स्टूडेंट्स ने बताया कि मैं अंग्रेजी, मास मीडिया और सामान्य परीक्षा के लिए उपस्थित हुआ. प्रश्नपत्र अच्छे थे और पाठ्यक्रम के अनुसार ही सवाल पूछे गए थे. लेकिन सर्वर की खराबी के कारण जनरल टेस्ट नहीं दे पाया.

अब इस परीक्षा का रिशेड्यूल किया गया था. सीयूईटी यूजी परीक्षा में टेक्निकल खराबी के कारण परीक्षा नहीं देने वाले उम्मीदवारों को फिर से मौका दिया जाएगा. केरल के जिलों में होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई थी वहीं नोएडा के कुछ सेंटर पर परीक्षा नहीं हई. करियर की खबरें यहां पढ़ें.

Order type (Regular / Stop loss / GTT)

what is Order type text image,order types in stock market image

⇒ दोस्तों share market में जब हम पहली बार कुछ खरीदते या बेचते हैं तब हमारे सामने तरह - तरह के order type दिखते हैं जिससे हम confuse हो जाते हैं कि आखिर किसका क्या मतलब होता है। और हमें As a trader इसके बारे में detail से पता होना चाहिए। तो चलिए आज के इस post में हम order type के बारे में सिखते हैं ।

(1) Regular Order :

» दोस्तों Regular order कि validity सिर्फ 1 दिन की होती है। यानी की आप जिस दिन order place करते हैं, उसी दिन execute हो सकता है, अगर order execute नहीं हुआ तब वह order expire हो जाएगा और Next day आपको फिर से order place करना पडेगा।

» Regular order में Intraday और delivery दोनो type का order ले सकते हैं। और इन दोनो में हम limit order या market order लगाकर limit price या market price पर खरीद सकते हैं।

Limit Price Order :

» इस order की मदद से हम अपने अनुसार जिस price पर किसी share को खरीदना चाहते हैं उस price पर order लगाकर खरीद सकते हैं।

Example -

» अगर किसी share का price 173 रू. Currently चल रहा है और हम उसे 170 रु में खरीदना चाहते हैं तो हम limit order लगाकर खरीद सकते हैं।

(We can place a buy order, at limit price)

Market Price Order :

» इस order की मदद से हम जिस share को खरीदना चाहते हैं उसे market में चल रहे current price ही पर immediately खरीद सकते हैं।

Example -

» अगर किसी share का price 173 रू Currently चल रहा है तो हम market order लगाकर तुरंत 173 रू में ही खरीद सकते हैं।

(we Can place a buy order, at Market price)

Note : ये सभी orders Option trading करते समय Index में भी लगा सकते है।

  • Time Decay क्या होता है ?
  • Stop loss, Target and Trailing S.L. क्या है ?
  • Option Buyers Maximum Profit and Loss
  • Option Sellers Maximum profits and loss

(2) Stop loss (SL) Order :

» Stop loss order की Validity भी सिर्फ एक ही दिन की होती हैं, और इसमें भी Intraday और delivery order ले सकते हैं।

लेकिन इसमें limit और market की जगह टेक्निकल एनालिसिस अब हुआ आसान stop loss order place किया जाता है। तो चलिए अब हम Sl order लगाना सीखते हैं।

दोस्तों stop loss order में बहुत ध्यान पूर्वक समझना होगा क्योंकी इसको समझना थोड़ा मुश्किल होता है। तो चलिए मैं इस मुश्किल को आसान करके समझाता हूँ ।

दोस्तों उपर दिए गए example में xyz share का current price 250/- चल रहा है। जिसका हम 1 quantity खरीद रहे हैं।

अब सबसे बड़ा Confusion तब होता है जब हम SL Price में market के price से ज्यादा डालते हैं। पहली बार में हम सभी यही सोचते हैं की SL price तो market के price से कम होना चाहीए।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो सही सोच रहे हैं इसमें कुछ गलत नहीं है, बस आपको ये पता होना चाहिए कि ऐसा सोचना कब सही है ।

» दोस्तों जब हम share sell करते हैं तब हम stop loss, Market price से कम रखते हैं, इसके बारे में हम आगे detail में जानेंगे।

» दोस्तों अभी हम share buy करने के लिए SL order लगा रहे हैं, इसलिए market price से ज्यादा डाले हैं।

Share Buy करते समय Sl order, market price से ज्यादा इसलिए रखते हैं, कि कहीं अचानक से Market price बहोत ज्यादा बढ़ जाता है जब हम Buy पर click करते हैं तो ऐसे में महंगे price पर buy हो जाएगा और हमारा loss हो सकता हैं।

Example :

मानलो xyz Company का share price अभी 250/- हैं और हम जैसे ही Buy पर click करते हैं और उसका market price 260 हो जाता है तो हमे

नुकसान होगा इस नुकसान से बचने के लिए हम 251/- का stop loss लगाते हैं जिससे उस share का price 251 से कम रहे तो Buy हो जाएगा और अगर price 260 होगा तब हमारा order execute ही नहीं होगा जिससे हमारा loss नहीं होगा।

“I hope कि आपको Sl order बहोत अच्छे से समझ आ गया होगा।”

(3) GTT Order :

दोस्तों GTT का full farm 'Good Till Triggered" होता है और इसकी सबसे खास बात यह है कि एक बार आपने GTT order place कर दिया, तो यह order पूरे एक साल (365 दिन) तक Active रहेगा। हालांकी इस order को manually कभी भी कर cancel कर सकते हैं।

Note - अगर आप GTT का उपयोग option trading में करते हैं तो इस order की validity Option के expiry date तक ही रहेगा, न कि 365 दिन तक।

दोस्तों GTT order के through भी आप Intraday या delivery में order ले सकते हैं। लेकिन GTT की दूसरी सबसे खास बात यह है की इसमें आप share buy करते समय ही stop less और target दोनो एक साथ लगा सकते हो।

दोस्तों GTT order का उपयोग ज्यादातर ऐसे trader या Investor करते हैं। जो अक्सर market में Active नहीं रहते, जिनको समय नहीं है market को बार- बार देखने का या जो लोग Job में हैं। वो लोग अक्सर GTT order लगाकर काम करते हैं।

'दोस्तों वैसे तो GTT order का महत्व हम सभी के लिए बहोत ज्यादा है, यह trading को बहोत आसान बना देता है लेकिन यह features सभी brokers नहीं देते हैं।

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