दिनेश जी आप की बात समझ में नहीं आई आज, अगर कोई आदमी अपनी पत्नी के नाम से मकान या कोई संपत्ति बनाता है, ओर फ़िर उन दोनों के मरने के बाद वो संपत्ति या मकान आनामी कहलाएगी या बाकी बचे परिवार के नाम होगा? कृपया दोबारा से विस्तार से समझाएँ।

बेनामी संपत्ति क्या है? संपत्ति के बेनामी हस्तांतरण पर रोक किस तरह की है?

दिनेश जी आप की बात समझ में नहीं आई आज, अगर कोई आदमी अपनी पत्नी के नाम से मकान या कोई संपत्ति बनाता है, ओर फ़िर उन दोनों के मरने के बाद वो संपत्ति या मकान आनामी कहलाएगी या बाकी बचे परिवार के नाम होगा? कृपया दोबारा से विस्तार से समझाएँ।

मुझे लगता है भाटिया जी बेनामी संपत्ति का अर्थ ही नहीं समझ पाए हैं। “बेनामी हस्तांतरण” कानून द्वारा उस हस्तांतरण को कहा गया है जिस में। कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को धनराशि के बदले हस्तांतरित करता है जिस की धनराशि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चुकाई या उपलब्ध गई हो।

इस तरह हस्तांतरित संपत्ति को बेनामी संपत्ति कहा गया है। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति भाटिया जी की पत्नी को बेचता है लेकिन उस की कीमत भाटिया जी की पत्नी के स्थान पर भाटिया जी ने चुकाई या उपलब्ध कराई हो। इस तरह यह संपत्ति बेनामी संपत्ति कहलाएगी। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि संपत्ति खरीदी तो भाटिया जी ने लेकिन उसका विक्रय पत्र पत्नी के नाम लिख कर रजिस्टर करवा लिया। इस तरह उस संपत्ति के वास्तविक स्वामी तो भाटिया जी हुए लेकिन दस्तावेजों और रिकार्ड में यह संपत्ति भाटिया जी की पत्नी के नाम दर्ज रहेगी।

1988 के पहले यह स्थिति थी कि इस बेनामी संपत्ति का वास्तविक स्वामी वही व्यक्ति माना जाता था जिस ने उस संपत्ति को खरीदने के लिए धनराशि चुकाई हो। लेकिन संपत्ति जिस के नाम दस्तावेजों या रिकार्ड में होती थी वह उसे दस्तावेजों के सहारे से किसी को बेच देता या दान, हस्तांतरण आदि कुछ कर देता तो बाद में इस तरह के विवाद अदालतों में आते थे कि वह संपत्ति तो बेनामी थी और वास्तविक स्वामित्व किसी और का था। इस से निरर्थक विवाद बहुत होते थे। 1988 में भारतीय संसद ने बेनामी हस्तांतरण (निषेध) अधिनियम 1988 पारित किया। इस में यह धनराशि का स्थानांतरण प्रावधान रखा गया कि कोई भी व्यक्ति बेनामी हस्तांतरण में शामिल नहीं होगा तथा किसी संपत्ति को बेनामी बता कर स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति को उस का वास्तविक स्वामी बताते हुए कोई भी वाद, दावा या कार्यवाही नहीं कर सकेगा। इस तरह किसी भी संपत्ति को बेनामी बताते हुए दायर होने वाले मुकदमों का अदालत में प्रस्तुत किया जाना बंद हो गया। बेनामी हस्तांतरण को इस कानून के द्वारा दंडनीय अपराध बना दिया गया जिस में तीन वर्ष तक की कैद की सजा का प्रावधान है जो बिना जुर्माने या जुर्माने के साथ हो सकती है। दूसरी ओर बेनामी घोषित की गई संपत्ति को सरकार द्वारा अपने कब्जे और स्वामित्व में लेने का धनराशि का स्थानांतरण प्रावधान भी किया गया।

लेकिन इस कानून में यह अपवाद भी रखा गया कि कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी या अविवाहित पुत्री के नाम से बेनामी संपत्ति खरीद सकता है जिसे अपराध नहीं समझा जाएगा। जब तक इस के विरुद्ध तथ्य किसी अदालत में प्रमाणित नहीं कर दिया जाए तब तक यह माना जाएगा कि वह संपत्ति खर

मनरेगा के संविदा कर्मियों के हो सकेंगे स्थानांतरण

संविदा स्थान परिवर्तन की नीति घोषित
भोपाल,28 मई (इ खबर टुडे ) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम में कार्यरत संविदा कर्मियों के अब स्थानांतरण हो सकेंगे। प्रदेश में मनरेगा संविदा कर्मियों के स्थान परिवर्तन के लिए नीति घोषित कर दी गई है। प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। स्थानांतरण स्वैच्छिक एवं प्रशासनिक दोनों स्तर पर किए जा सकेंगे। स्थानांतरण एक जून से 30 जून के मध्य होंगे। स्थानांतरण के लिए 30 मई तक प्राप्त आवेदनों पर विचार किया जाएगा।

संविदा कर्मियों के स्थान परिवर्तन, रिक्त पदों की उपलब्धता, योजना में कार्यभार एवं संविदा पदों की आवश्यकता तथा प्रशासनिक मद में धनराशि की उपलब्धता तथा संभाग/जिले में इस संवर्ग के अन्य एवं समकक्ष पदों की पूर्ति तथा रिक्ति की स्थिति के अनुसार होंगे। स्वैच्छिक आधार पर पति एवं पत्नी दोनों के शासकीय सेवा/ शासन अंतर्गत संविदा सेवा में होने पर एक स्थान/जिले में यथासंभव पदस्थापना के लिए स्वयं अथवा आश्रितोंं की गंभीर बीमारी से उत्पन्न परिस्थितियों के लिए एवं संविदा कर्मियों के पारस्परिक स्वैच्छिक आवेदन पर व आपवादिक परिस्थितियों के कारण विशेष प्रकरण धनराशि का स्थानांतरण में विचार किया जाकर स्थान परिवर्तन किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर भी मनरेगा में कार्यरत संविदा कर्मियों के स्थानांतरण होंगे।

जिले से बाहर राज्य स्तर की अनुमति से होंगे स्थानांतरण

एक संभाग से दूसरे संभाग में और एक जिले से दूसरे जिले के बीच होने वाले समस्त स्थान परिवर्तन के लिए निर्णय एवं अनुमति राज्य स्तर से दी जाएगी। इसमें शासन के अनुमोदन के लिए मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद को नोडल एजेन्सी बनाया गया है। स्वैच्छिक एवं प्रशासकीय दोनांे श्रेणी में जिले के अन्दर स्थान परिवर्तन के लिए जिला कलेक्टर सक्षम होंगे। कलेक्टर इस नीति के समस्त प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कर अपने जिले के अन्दर दोनों श्रेणी में स्थान परिवर्तन कर सकेंगे।

Money Transfer in Wrong UPI ID : गलत UPI आईडी में ट्रांसफर हो गया है पैसा, तो जानें आपको पहले कौन सा कदम उठाना चाहिए?

Money Transfer in Wrong UPI ID : अगर आपने गलत UPI आईडी में पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं, तो उसके लिए आपको शिकायत दर्ज करानी होगी, सुनवाई नहीं होने पर आप गुगल पे या पेटीएम से अनुरोध कर सकते हैं. इसके बाद भी मसली नहीं हल होता है तो आरबीआई के लोकपाल से शिकायत कर सकते हैं.

Published: December 14, 2022 9:11 AM IST

If money transferred in wrong UPI ID

Money Transfer in Wrong UPI ID : यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने लेन-देन करने के तरीके में क्रांति ला दी है. ज्यादातर मामलों में एक क्यूआर कोड को स्कैन करने और मनचाही रकम को सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित करने की अनुमति देकर ज्यादातर मामलों में नकदी का उपयोग करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है.

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सड़क के किनारे के विक्रेताओं से लेकर खुदरा श्रृंखलाओं तक, UPI अब भारत में सर्वव्यापी हो गया है, क्योंकि इसके द्वारा किए जाने वाले लेन-देन में आसानी होती है.

UPI एक सुरक्षित भुगतान प्रणाली है, आपकी ओर से असावधानीपूर्ण त्रुटियां कभी-कभी वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती हैं.

गलत UPI आईडी दर्ज करना और गलती से किसी दूसरे के बैंक खाते में पैसे भेजना उन परिदृश्यों में से एक है जिसका आपने सामना किया होगा.

हममें से ज्यादातर लोग ऐसी स्थितियों में घबरा जाते हैं लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार आप सही कदम उठाकर हस्तांतरित राशि की वसूली कर सकते हैं.

आरबीआई का कहना है कि डिजिटल सेवाओं के जरिए अनजाने में हुए लेन-देन के मामले में पीड़ित व्यक्ति को पहले इस्तेमाल की गई भुगतान प्रणाली में शिकायत दर्ज करनी चाहिए.

आप पेटीएम, गूगल पे और फोनपे जैसे एप्लिकेशन की ग्राहक सेवा से मदद ले सकते हैं और धनवापसी का अनुरोध कर सकते हैं.

यदि भुगतान प्रणाली आपकी समस्या का समाधान करने में विफल रहती है, तो आप डिजिटल लेनदेन के लिए आरबीआई के लोकपाल से संपर्क कर सकते हैं.

आरबीआई के अनुसार, योजना के खंड 8 के तहत निर्दिष्ट शिकायत के आधार पर कवर की गई कुछ सेवाओं में कमी के लिए योजना में परिभाषित प्रणाली प्रतिभागियों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतों का निवारण करने के लिए नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी है.

शिकायत तब दर्ज की जा सकती है जब भुगतान प्रणाली यूपीआई, क्यूआर कोड और अन्य के माध्यम से भुगतान लेनदेन से संबंधित आरबीआई के निर्देशों का पालन नहीं करती है, जैसे कि लाभार्थियों के खाते में धनराशि जमा करने में विफलता या उचित समय के भीतर राशि वापस करने में विफलता.

लाभार्थी के खाते में गलत तरीके से धनराशि स्थानांतरित होने पर लोकपाल से भी शिकायत की जा सकती है.

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JHANSI:मध्याह्न भोजन की धनराशि पर होगी अब PFMS की नजर|


सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी स्कूलों में पठन पाटन के साथ ही छात्र छात्राओं के लिए न्दोपहर में पौष्टिक भोजन की भी व्यवस्था है। झांसी के 1546 स्कूलों में मध्याहन भोजन वितरण किया जाता है। इसके लिए मध्याहन भोजन प्राधिकरण परिवर्तन लागत सहित अन्य योजना के अंतर्गत धनराशि स्कूलों के खातों में भेजता है। अब इस धनराशि पर पीएफएमएस से नजर रखी जाएगी। यह धनराशि का स्थानांतरण विद्यालयों के एमडीएम खातों में अपलोड किया जा रहा है। इसके लागू होने से एमडीएम योजना में कमीशन खोरी एवं भ्रष्टाचार पर काफी अंकुश लग सकेगा। साथ ही अधिकारियों की सीधी निगरानी भी रहेगी। इधर प्राधिकरण के जिला समन्वयक राज बहादुर सिंह ने बताया कि एमडीएम धनराशि पर अब नजर पीएफएमएस के माध्यम से होगी।

बहराइच: तहसील के अधिवक्ताओं ने एसडीएम के खिलाफ निकाला मोर्चा, स्थानांतरण की मांग

अमृत विचार, बहराइच। मोती पुर तहसील के अधिवक्ताओं ने शनिवार को एसडीएम के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन और बैठक किया। सभी ने कहा कि एसडीएम द्वारा कामचोरी की जा रही है। पेश कार की तैनाती न करके एक संग्रह अमीन से सभी काम के लिए अवैध वसूली कराई जा रही है। एसडीएम का स्थानांतरण …

अमृत विचार, बहराइच। मोती पुर तहसील के अधिवक्ताओं ने शनिवार को एसडीएम के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन और बैठक किया। सभी ने कहा कि एसडीएम द्वारा कामचोरी की जा रही है। पेश कार की तैनाती न करके एक संग्रह अमीन से सभी काम के लिए अवैध वसूली कराई जा रही है। एसडीएम का स्थानांतरण न होने पर सभी अनिश्चित कालीन कोर्ट के बहिष्कार की चेतावनी दी है।

तहसील मोतीपुर में कार्यरत उपजिलाधिकारी की कार्यशैली को लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। शनिवार को आदर्श बार एसोसियेशन मिहींपुरवा के बैनर तले आयोजित बैठक में अधिवक्ताओं ने एसडीएम पर न्यायालय कार्यों का संचालन काफी समय से न किए जाने एंव अमानवीय व्यवहार करने तथा कार्यालय में अवांक्षित व्यक्तियों से अवैध वसूली के साथ साथ एसडीएम पर अनेक अविधिक गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगाया है।

आदर्श बार एसोसिएशन के तहसील अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि उपजिलाधिकारी अपने कार्य के प्रति उदासीन है तथा न्यायालय कार्यों के संचालन में भी लापरवाही बरती जा रही है। जिसके कारण तहसील आने वाले ग्रामीणों को काफी असुविधा हो रही है।

उन्होने कहा कि तहसील में जारी अवैध वसूली व एसडीएम के अमानवीय कृत्य व्यवहार से आहत होकर समस्त अधिकता उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण होने तक अनिश्चितकालीन कोर्ट का बहिष्कार करेंगे। बैठक और प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने तहसील में जारी अवैध वसूली को लेकर उपजिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी पर निशाना साधा है।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि उपजिलाधिकारी न्यायालय कार्यालय पर कोई भी पेशकार कार्यरत नहीं है। ऐसे में संग्रह विभाग के एक कर्मचारी को अवैध वसूली के लिए लगाया गया है।

एसडीएम से नाराज अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण होने तक न्यायालय कार्य के बहिष्कार की घोषणा की है। इस मामले में उपजिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के सीयूजी और पर्सनल नंबर पर फोन लगाया गया, लेकिन उनका कोई भी नंबर नहीं मिल सका। दोनों नंबर नॉट रीचबल बताता रहा।

दूसरी बार तहसील में मिली तैनाती

विवादों से नाता रखने वाले उपजिलाधिकारी मोतीपुर ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी दो वर्ष पूर्व तहसील में तैनात हुए थे। उनके स्थान पर कीर्ति प्रकाश भारती को तैनाती दी गई। धनराशि का स्थानांतरण छह माह पूर्व पुनः ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने अपनी तैनाती दूसरी बार तहसील में करवा ली। लोगों की मानें तो नव सृजित तहसील में जमकर घोटाला किया जा रहा है। जिस पर अधिकारियों की नजर नहीं जा रही है।

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